Thursday, July 05, 2018

Art Vibration - 496



How To Develop To our culture ?  When Our Academic System Is Poor …


Friends  we know each one culture is develop by a academic society or that’s academic system . its example we have in our art history , actually art and culture is real base of  a culture  format . in history we have many examples of many cultures like ROM, GREEC, EGYPT,AJANTA, JAIN TIME , SHIA & VISHANU KAAL and much more example we have in our world History . its live form , only in art form today in front side of us  . that is painting, sculpture ,craftsmanship and some more manual designs of art and crafts elements .

In that time it was possible  because a very academic society  was working  for culture development . they know the real mean of art and craft . they are using to art and craft for design to life and culture too , they accepted art can give job, food, aesthetic level of mind, and a very fine culture,  so they were following to art and craft for culture design in their life  time . 

But today our academic level is going down and down day by day .it is critical for our culture or society, its true of today  . we are forgetting to our real rights for nature or culture . we are forgetting to our academic basics  so condition is critical for art and culture or that’s creators. .

The creators are artists academic artists. ( I am also include in that list because last 26 years to continue I am busy in visual art for create to better culture or art future ) I have academic art education from very old academic art institute of INDIA that’s name Is Rajasthan School of Art  Jaipur. Rajasthan .

But in contemporary  time we have opened many academic institutes or societies in our social  system . how many it is work ? no one can say properly about it . 

You know I have completed masters in painting in year 2005 but as a art master I am working in our society as a freelancer , it is a question to academic system why this condition  with a academic artist ? as a artist I have completed international art show with other international academic societies of other countries like Italy , France , Greek ,America  but in my nation INDIA or in state Rajasthan I am not accepted as a academic artist it is another critical question to our academic system ? 

By luck  last month our State Academi Rajasthan Lalit Kala Academy organized a art exhibition of 147 artists of Rajasthan , the Academy listed to artist from academy record list , a new secretary Dr. Surendra Soni was taken this kind of art step for a art sound of Rajasthan Lalit Kala Academy Jaipur . by luck the RLKA called me for my work about their Exhibition , they posted me a official  invitation letter /call letter for  my art work ( it mean I was accepted as a academic Artist  by efforts of New Secretary of RLKA  Dr. Surendra  Soni  ) .  in reply of Academy letter I wrote a letter in Hindi -
( I wote it  to secratary of RLKA :- A letter  to Secretory of Rajasthan lalit Kala Akadami Jaipur ..सेवा में ,
 
श्री मान सचिव महोदय ,
डॉ. सुरेन्द्र कुमार सोनी ,
राजस्थान ललित कला अकादमी ,
जयपुर !
विषय :- जहांगीर आर्ट गैलरी में चित्र प्रदर्शनी हेतु  चयनित मेरे नाम और कला कर्म के  सन्दर्भ में !
मान्यवर ,
सादर निवेदन है की मैं विगत २६ वर्ष से निरंतर कला साधना में सलंग्न हूँ ! राजस्थान ललित कला अकादमी ने एक बार मेरी कला अभिव्यक्ति को  छात्र कला प्रदर्शनी में शामिल भी किया था !  उसके बाद मैंने कला मेलों में भी अपनी भागीदारी पूर्ण सक्रियता से दी ! २००७ तक मै  निरंतर  राज्य कला प्रदर्शनी में अपनी प्रवष्टि प्रेषित करता रहा हूँ ! पर हर बार मुझे उपेक्षा ही हाशिल हुई ,अकादमी की तरफ से ! निराष  अकेला असहाय मै थक गया और २००७ के बाद मैंने अकादमी की समस्त गतिविधि से अपने आप  को दूर कर के अपने स्वतंत्र कला सृजन में सलंग्न हो गया ! आप को विदित हो की राज्य कला प्रदर्शनी  २००५ -०६ /२००६-०७ में  मैंने मेरा मास्टर ऑफ़ फाइन आर्ट होने के बाद की  ६० गुणा ४० इंच की तीन चित्र कृतियाँ  इटालिक फ्रेम  विथ गिलास प्रेषित की थी ! जो की चयन प्रक्रिया में नहीं ली गयी जिसे मैंने आज  तक अकादमी से नहीं उठाया ! वे अकादेमी के स्टोर रूम में कही रखी हुई होगी या क्या स्थिति है  आप संज्ञान लेवे !
प्रश्न ये बनता है  की मैं वही योगेंद्र कुमार पुरोहित बीकानेर  निवासी  मास्टर ऑफ़  फाइन आर्ट किया हुआ चित्रकार हूँ ! तब मुझे उपेक्षित किया गया और आज मुझे राजस्थान ललित कला अकादेमी की जहांगीर आर्ट गैलरी में होने वाली कला प्रदर्शनी के लिए चयनित किया जा रहा है , बिना मेरे  आग्रह और चयन प्रक्रिया के लिए चित्र प्रेषित किये बगैर ? मैं  समझसकता हूँ  आप की कार्य प्रणाली और सृजन प्रोत्सान के भाव को शायद इसीलिए आप से मैं  मेरी ये मन की बात डॉ. अमिताभ बच्चन  जी के बाद आप से साझा कर रहा हूँ आप की इ मेल और अकादमी  की एक फ़ोन कॉल आने के बाद !
चूँकि आप ने मुझे अपनी चयन प्रक्रिया में लिया है मुझ  पर विस्वास किया है इस विस्वास के आधार  पर आज मैं  आप से ये आग्रह करता हूँ की मेरी अंतिम प्रवष्टियों जो की राजस्थान अकादमी के संकलन या स्टोर में सुरक्षित है ( संभावना )  को आप जहांगीर आर्ट गैलरी की आगामी कला प्रदर्शनी में शामिल करे ! फ़ोन कॉल पर मैडम ज्योति जी ने  सूचित किया की मैं  अपना बेस्ट वर्क अकादमी कार्यालय में प्रेषित करूँ तो उन्हें  मैंने सूचित किया की  मेरे तीन चित्रों के बारे में जो की मेरा बेस्ट था ठीक वैसे  ही चित्र  है जैसे की रविंद्र नाथ ठाकुर , जामिनि रॉय , अवनींद्र नाथ ठाकुर , अमरता शेरगिल , देवीप्रसाद रॉय चौधरी , एम् ऍफ़ हुसैन , मंजीत बाबा , रामकुमार , राम गोपाल विजय वर्गीय , कृपाल सिंह शेखावत , ज्योति स्वरुप , पि ऍन चोयल , रामेश्वर सिंह , देवकीनंदन शर्मा ,आर बी  गौतम , डॉ. विद्यासागर उपाध्याय जी के है !
कला इतिहास में लेओनार्दो डा विंसी की कृति मोनालिसा समय से नहीं , नए या पुराने से नहीं लेओनार्दो की  अभिव्यक्ति और चित्र प्रेम की वजह से बेस्ट थी,  है और आगे भी रहेगी ये हम सब कला परिवार के  लोग जानते है !
वान  गोग की विन्सेंट शूज पेंटिंग संवेदना की चरम को छूने वाली कृति है जिसे उन्होंने नितांत एकांत में रचा होगा जो आज भी बेस्ट है और आगे भी रहेगी  ! इसी प्रकार माइकल एंजिलो की डेविड मूर्ति शिल्प या सल्वाडोर डाली की टाइम फ्लो चित्र कृति  !
ये सब मैं  इसलिए  आप से साझा  कर रहा हूँ ताकि आप मुझे और मेरी कला अभिव्यक्ति की विचारणा को ठीक से समझ सके की मैं चित्रकला में कहा जी रहा हूँ और कितना !
मेरे लिए चित्रकला एक मौन भाषा है समाज और समय से संवाद करने की ! मैंने इसे व्यवसाय नहीं बनाया और न ही बनाना चाहा था /  क्योकि  हरिद्वारी प्रशाद ( कला दार्शनिक ) कहते है की कला बुद्धि व्यापार  है ! और मैं उनके इस तर्क से  पूर्ण रूपेण सहमति रखता हूँ , विष्णुधर्मोत्तर पुराण में तो कला को सर्वोपयोगी धन कहा है और मैंने इस धन को खूब बाँटा है इन २६ सालों में ये ख़तम नहीं हुआ और बढ़ गया है इस पत्र से ये बात आप समझ चुके होंगे ऐसा मेरा विस्वास है !
अतः अंत में मैं यही कहूंगा की आप मेरे अकादमी में  रखे हुए चित्रों को जहांगीर आर्ट गैलरी में प्रदर्शित करे और मेरा राजस्थान ललित  अकादमी पर से  खोये हुए विस्वास को पुनः बनाये,  तो मैं आप का कृतज्ञ रहूँगा ( तन, मन और धन का बहुत हास और उपहास हुआ है मात्र राजस्थान ललित कला अकादमी की  राज्य कला प्रदर्शनी की चयन प्रक्रिया में आने हेतु  और प्रफुल्ला धानुकर आर्ट फाउंडेशन मुंबई ने वर्ष  २०१८ में मुझे कलानन्द राज्य कला पुरस्कार  से सम्मानित किया  है   , इस बात से मन खिन है  और राजस्थानी भाषा की वो केबत याद आती है की  " घर रा जोगी जोगणा, बार का जोगी सिद्ध "  !

मुझे जहांगीर आर्ट गैलरी में प्रदर्शित होने वाली कला प्रदर्शनी के लिए चित्रकार  के रूप में चयन प्रक्रिया में रखने हेतु , मुझे राजस्थान ललित कला अकादमी के ऑफिस से फ़ोन कॉल और इ मेल के जरिये सूचित करने हेतु आप को साधुवाद !

(  जहाँ तक मुझे याद पड़ता है हाड़ोती अंचल के कोटा कैंप के लिए २००९ में चित्रकार चंद्रशेखर सैन से मैंने आप को कैंप में शामिल करने की बात कही थी क्योंकि  उस कैंप में आये हुए सभी कलाकारों का चयन मेरे सुझाव के आधार पर ही हुआ था !  ये भी विचारणीय  बात है )

आभार
 चित्रकार योगेंद्र कुमार पुरोहित
मास्टर ऑफ़ फाइन आर्ट
कमला सदन ,बंगला नगर ,
पुराने शिव मंदिर के पास ,
पूगल रोड , बीकानेर
पिन ३३४००४
फ़ोन ९८२९१९९६८६
    ८२०९८५१५५७
इ मेल yogendrapurohit@yahoo.com   ) 
blob:https://web.whatsapp.com/87aee5bd-45f8-45a5-9e74-3b361abf213f

 blob:https://web.whatsapp.com/87aee5bd-45f8-45a5-9e74-3b361abf213f

 and posted to Secretary of RLKA  On E Mail of RLKA . in that letter I informed to Secretary of RLKA about  my work or condition in state academy . Dr. Surendra  Soni  noticed to  my letter /matter and collected  my painting from Store of RLKA , I have submitted  my three art works for state art Exhibition in year  2005-2007 . that time my art  works were  not selected  but that was  my academic works after  my masters ( academic  art Education from Academic Art Institute ) from Rajasthan School of Art  Jaipur . 

 ( list of  RLKA  ARTISTS :- 

मुमल नेटवर्क, जयपुर। जहांगीर आर्ट गैलेरी में हो रहे ग्रुप शो के लिए अकादमी की अनुभवी व जानकार चयन समिति द्वारा पूरे राजस्थान से चुने गए कुल 147 कलाकारों की लिस्ट प्रस्तुत है। सभी चयनित कलाकारों को शुभकामनाएं...।
वे योग्य वरिष्ठजन जो चयनित होनें के लिए आमंत्रण के बावजूद शो में शामिल होने को तैयार नहीं हुए, वे जो आमंत्रित किए जाने के बाद भी चयन से वंचित रहे और वे जो चुने ही नहीं गए वे फिलहाल अपनी स्थिति और कृतित्व की स्वयं समीक्षा करें। प्रखर व बिंदास लोग हमसे भी साझा करें, मूमल आपके विचार प्रकट करने के अधिकार की पूरी रक्षा और सम्मान करेगा।
चयनित  कलाकारों की लिस्ट
1. अब्बास बाटलीवाला
2. अदिति अग्रवाल
3. अजय दर्शन सिंह राजावत
4. अजय मिश्रा
5. अजय सिंह पीलवा
6. आकाश चोयल
7. अमित हरित
8. अमित राजवंशी
9. अंकित पटेल
10. अन्नपूर्णा शुक्ला
11. अनुपम भटनागर
12. अनुपमा जैन
13. अर्चना
14. पद्मश्री अर्जुन प्रजापति
15. अरविन्द मिश्रा
16. आशीष कुमार श्रृंगी
17. अशोक गौड़
18. अशोक हाजरा
19. बी.सी.गहलोत
20. बसन्त कश्यप
21. भवानी शंकर शर्मा
22. भीम सिंह हाड़ा
23. भुवनेश जैमिनी
24. चन्द्र मोहन शर्मा
25. चन्द्र प्रकाश जैन
26. चन्द्र शेखर सैन
27. चरण शर्मा
28. चिमनराम डांगी
29. चिन्मय मेहता
30. दीपक खण्डेलवाल
31. धर्मवीर वशिष्ठ
32. दिलीप सिंह चौहान
33. दिलीप शर्मा
34. दिनेश उपाध्याय
35. दीपिका हाजरा
36. एकेश्वर प्रसाद हटवाल
37. इरा टाक
38. गौरी शंकर जांगिड़
39. गिरीश चौरसिया
40. गोपाल आचार्य
41. गोपाल शर्मा
42. गोपाल स्वामी खेतांची
43. एच. आर. कुम्भावत
44. हरीश वर्मा
45. हेमन्त द्विवेदी
46. हेमन्त जोशी
47. जगदीश नन्दवाना
48. जगमोहन माथोडिय़ा
49. ज्योति प्रकाश गौतम
50. कैलाश चन्द शर्मा
51. कमल जोशी
52. कपिल शर्मा
53. केशव शर्मा
54. खुश नारायण जांगिड़
55. किरण मूर्दिया
56. किरन सोनी गुप्ता
57. किशन मीणा
58. कृष्णा महावर
59. लाखन सिंह जाट
60. लाल चन्द मारोठिया
61. लक्ष्मीकांत शर्मा
62. लक्ष्यपाल सिंह राठौड़
63. लोकेश जैन
64. लोकेश कुमावत
65. मदन मीणा
66. मदन सिंह राठौड़
67. महावीर स्वामी
68. महेश सिंह
69. महेश स्वामी
70. मनन चतुर्वेदी
71. मणि भारतीय
72. मनीष वाजपेयी
73. मनोज टेलर
74. मीना बया
75. मीनाक्षी कासलीवाल भारती
76. मोहम्मद सलीम
77. मुकुल मिश्रा
78. नरेन्द्र सिंह 'चिंटूÓ
79. नीरज शर्मा
80. नेमा राम जांगिड़
81. पंकज गहलोत
82. पवन कुमार शर्मा
83. पूनम माथुर
84. प्रदीप शर्मा
85. प्रदीप वर्मा
86. प्रमोद कुमार सिंह
87. प्रतीक कुमावत
88. पुष्पकांत त्रिवेदी
89. आर.बी. गौतम
90. राहुल उषाहरा
91. राजाराम वयास
92. राजेन्द्र गौड़
93. राजेन्द्र मिश्री
94. राकेश सिंह
95. राम जायसवाल
96. राम प्रतिहार
97. राम सोनी
98. रणजीत सिंह चूड़ावाला
99. रवि कुमार योगी
100. रेखा अग्रवाल
101. रेखा भटनागर
102. ऋतु जौहरी
103. रोकेश कुमार सिंह
104. रूद्र भारद्वाज
105. सचिन्दानन्द सांखलकर
106. संजीव शर्मा
107. सन्त कुमार
108. सौरभ भट्ट
109. शाहिद परवेज
110. शैल चोयल
111. पद्मश्री शाकिर अली
112. शालिनी भारती
113. शरद भारद्वाज
114. शीतल चितलांगिया
115. शेख मोहम्मद लुकमान
116. शिव कुमार शर्मा
117. शिव शंकर शर्मा
118. श्वेत गोयल
119. स्नेहलता शर्मा
120. सोहन जाखड़
121. सुब्रतो मण्डल
122. सुधीर शर्मा
123. सुधीर वर्मा
124. सुमन गौड़
125. सुनीत घिल्डियाल
126. सुनील चेजड़ा
127. सुनील जांगिड़
128. सुनील कुमार कुम्भावत
129. सुरभि सोनी
130. सुरेन्द्र सिंह
131. सुरेन्द्र पाल जोशी
132. सुरेश जोशी
133. सुरेश पाराशर
134. सुरजीत कौर चोयल
135. सुशहल निम्बार्क
136. सैयद मेहर अली अब्बासी
137. ताराचन्द शर्मा
138. तसलीम जमाल
139. पद्मश्री तिलक गीताई
140. तिलक राज
141. वीरबाला भवसर
142. विजय कुमावत
143. विनोद भारद्वाज
144. वीरेन्द्र बन्नू

145. योगेन्द्र कुमार पुरोहित
146. योगेन्द्र सिंह नरूका
147. युगल किशोर शर्मा  )






Junior Artist Vikram  Singh  with My Art work At Jehangir Art gallery  Mumbai 2018 .

Now  my art work was exhibited at Jehangir Art Gallery of Mumbai on date 26 June 2018 . RLK Academy published  to my art work in catalog . After 10 year RLKA accepted to me as  a Academic Artist when a New academic officer came in RLKA . it mean I was academic but their poor system or setup was not accepted to me , why ? I don’t know but they did not accepted to my academic art work . it is fact of  my past art life before 2018 . 

Kind  your information Prafulla Dahanukar Art Foundation  submit me kalananad State Award in this year 2018 , Prafulla Dahanukar Art Foundation is a PVT .Art promotion  community of Mumbai , Please  notice it And RLKA is branch of Center Academy of my Nation ,its monitoring  under our Govt. of INDIA .our Art and Culture Ministry is funding to national academy or national academy is funding to all state academies for develop to art and culture .its Indian culture design format in our system of GOVT  of INDIA . 

So I noticed to a very critical point in Exhibition of RLKA ( Exhibition venue was Jehangir Art Gallery Mumbai very high rental gallery of INDIA ) 
My Work  Display at Jehangir Art gallery Mumbai  2018 , photo  by Artist  Suresh Meena  2018


We know Academy setup was designed for direct benefit to creative Artist , all academies are organize / provide art exhibitions, art workshops, scholarships, fellowships  to academic artists . Academies were  not cutting any kind of tax or charity fund from artist work sales or any remunerations. 

 But this Art Exhibition of RLKA ( Jehangir Art Gallery  Mumbai  2018 )  bund to artist for  15 %  welfare fund on sale of Artist  work . so I think academy has forget to real duty and aim of Academy foundation . why we were created academy and what is doing today our academy with Artists ? it is a big question for our Ministry of Art and Culture of GOVT of INDIA . 

In this case I am seeing artists are  trying to collect to fund by sale of art for RLKA . it is painful for me or for our culture setup . it is painful for academic format designer , he /she did not thought this!  when he/she created this very supportive academic system for  artists benefit or culture developments ..
My work Display by RLKA  at Jehangir Art Gallery  Mumbai 2018
 When academies are going on this path then how to in future we can develop to a fine rich culture for our future . by this poor academic system it will not possible I am telling to you very clear  so notice it and get alertness today for future culture now . it is very must ..

Because I notice it and then write it here  with a question  How to Develop to culture ? when our Academic system is poor ..

Yogendra kumar purohit
Master of Fine  Art
Bikaner, INDIA

Friday, June 01, 2018

Art Vibration - 495



I KNEW HOW TO
SIR RAVINDRA NATH THAKUR TRANSLATED TO LITERATURE IN VISUAL ART …


Friends last week  I lived busy in a child art workshop in my city . The Ajit Foundation Bikaner invited to me for this child art promotional art workshop . they needed my presence as a guide of visual art . Coordinator master Sanjay Shrimali called me for this child art workshop and he demanded to me some ideas about more creative art workshop of child art . he wanted to me something different or more sensible guide line for child artists . 

So I planned a exercise for child artists . I created a task of Imagination for kids minds . for imagination of kids we provided child literature stories to kids in workshop . As a Guide I gave only one guide line to kids for their own creation , I pull them on path of imagination through story track .that was in literature  form ( words ) . 

In that workshop kids were read to stories  in groups of five members , we gave seven to ten stories to kids for reading . after reading kids translated that in their own imagination  by self exercise of imagination or translation ( word to visual ) . 


  
As a master of Visual art I did not gave any tips or drawing  guide line , because I want to see how to kids imagine to story and how to they transfer with their own /pure art skill . 


 I want to knew how to kids convert to words in visuals . I am happy they all kids created 10 th  to 15 th  paintings on each one story . it was surprising for me or for Ajit Foundation too . because in that workshop I did not taught to visual art on board  or in my speech . kids done that by their own creativity , I sure after this art workshop their creativity got some more up level of  imagination /creation of art by support of literature . they knew literature is also part of art and art is also part of literature , they both communicate to society for a right message of life or guide line of culture development in our world .  

In that workshop kids read to story   continue two days and one day I shared  some paintings images of Sir Ravindra Nath Thakur  on computer monitor of Ajit Foundation . when kids were visiting  to original painting images of Sir Ravindra Natha Thakur . in same time they  were getting self confidence for their own painting or imagination . 
 
 

kind your information Sir Ravindra Nath Thakur  Nobel  rewarded writer cum painter  created painting in his 67 years old age , in that time he said poetry and painting are same , they both need true emotions , pure imagination, there skill is not a matter but creation is very must .  he was follower of Indian aesthetic logic , SATYAM SHIVAM SUNDARAM

This  same aesthetic level I saw in art workshop of Ajit Foundation . all child artists were created paintings by their own  pure imagination on child literature  .

When kids were busy in paintings there I were noticing to their live activity of painting work , I observed what they thought  and how to they transfer on paper in line or color . their observation was supporting to them for visuals creation . they created many characters of stories , some animals like dog, deer , cow  ( Sir Ravindra natha Thakur was painted   Bangal Tiger from His own  skill ,observation or imagination ) .

 I compared the work of kids or sir Ravindra Nath Thakur , in my mind and I knew they both were  on  same level of creativity , sir Ravindra Nath Thakur was a great literature person  so he was transferred very easily in visuals to his literature thought or emotions but on age of 67 years or without academic skill of visual art. 

 

 


In art workshop of Ajit Foundation kids translated literature in visuals without academic skill of visual  art but in this exercise they knew how to read story, how to imagine to a story, literature , or words and how to transfer that in visuals from Imagination or self skill ( pure skill ) . by this live art  exercise of kids I know how to Sir Ravindra Nath Thakur  was translated   his internal literature , emotions and stories in form of visual art . 

( In visuals you can see to child art workshop of Ajit Foundation I shoot to some pictures from My Camera  and Librarian of Ajit Foundation master Shailendra Sarswati also shoot to our workshop and shared with us or on online networks too )  

So here I said I know How to Sir Ravindra nath Thakur translated to literature in visual art ..

Yogendra  kumar purohit
Master of Fine Art
Bikaner, INDIA