Master Chandan Singh Touched to Our Past Memory By Photo Images.
Friends, the images of the past refresh us, and when these images are presented before us by a very close personality or loved one, our hearts become overwhelmed with emotion! Some such images were sent to me yesterday on the occasion of Janmashtami by my younger brother, Master Chandan Singh Rathore (Hukum), who is a painter, landscape photographer, former press photographer for Hindustan Times Jaipur, and currently an alumnus member of Rajasthan School of Art College Jaipur. It was a collection of about 65 to 70 photographs, which I would call a complete photo album, solely focused on me, taken by Master Chandan Singh during my interview at my art studio, Yogendra Art and Designing Studio, Bikaner! I don't remember the year, but it must have been around 2013 or 2014; what was once a mere conversation has now become a story—one that is true and astonishing! Love and relationships bind the mind so deeply that neither the body nor geographical distances matter anymore! In 2008, I moved from Jaipur to Bikaner; I had completed my Master of Fine Arts By creating art !
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Photography by Master Chandan Singh ( file Photo from His own photo album |
But I had left something incomplete behind due to the twists and turns of time! Among the things I left behind, there was a silent relationship with Master Chandan Singh! And time forged that severed bond again in Bikaner! Master Chandan Singh is also a good biker, and being a free-spirited person, he came to Bikaner with his friend, who is the nephew of the legendary classical singer late Bhupen Hazarika (whose name has slipped from my memory over the years), to meet me! It was indeed a surprise for me that suddenly my Chandan was right in front of me in my Bikaner! When I met Chandan in Bikaner, he hugged me without saying anything as always and held me tightly in silence for a long time! I asked him, 'What happened, Chandan?' but he was not in a position to say anything. However, his eyes were expressing a lot about his feelings and affection, which he wanted to absorb by hugging me! Then the three of us went to my studio to learn about the main reason for his visit over tea. It was simply to meet me and to always keep my shadow with him.
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Photography by Master Chandan Singh ( file Photo from His own photo album |
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Photography by Master Chandan Singh ( file Photo from His own photo album |
And through live video recording! We had a general conversation, or I could say it was a dialogue without any exaggeration! Actually, Chandan was preparing for a long journey, and he probably needed my virtual images for some necessary items for that trip! So, a video of my conversation gestures as well (the film)! So that he could fill that empty space with images in his solitude from time to time! (Because we met almost daily in Jaipur, sometimes in front of the art college, sometimes at Jawahar Kala Kendra, and sometimes at the Indian Coffee House on MI Road, discussing art and social issues for hours! I often quelled Chandan's curiosities that arose from reading books!) We had light snacks with tea, and then Master Chandan took my pictures, and his friend also made a video while we were conversing! Then Master Chandan engaged in informal discussions with me on numerous topics logically and compiled them in a video with his camera! The conversation went on for so long that the camera's memory was full! But the conversation continued, because he was in a continuous emotion and Chandan wanted to capture those moments completely! That was natural!
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Photography by Master Chandan Singh ( file Photo from His own photo album |
Then my mother called us for food from the kitchen, so the three of us came home, ate together while seated, and that evening Master Chandan set off with his friend for the next leg of his journey! I wanted to help but Hukoom assured me that there were enough means for the journey ahead! Master Chandan's long journey is still taking place in the valleys of Himachal in some hill village! He often shares stunning images of natural landscapes through social media! To provide a feeling of natural joy! Yesterday, on the festival of Janmashtami, Master Chandan Singh surprised me by suddenly sharing those images that he had taken many years ago in my studio and now while sharing them made me realize that somewhere something has now been completed in my brother Chandan's mind and thoughts! Looking at those images, I am truly delighted and grateful to Master Chandan, because during his long journey he remembered me and my...
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Photography by Master Chandan Singh ( file Photo from His own photo album |
I have preserved the memories, and the proof is the images sent by him yesterday, which convey the feeling of my presence with him in his solitude! The esteemed Master Chandan Singh, greetings to you! Here are some images shared with me by my younger artist brother Master Chandan Singh for your observation!
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Photography by Master Chandan Singh ( file Photo from His own photo album |
In Hindi as a note -
मित्रों अतीत की छवियाँ हमें तरोताजा कर देती है और ये छवियां किसी अति निकटतम व्यक्तित्व या स्नेही की और से हमारे समुख रखी जातीहै तो मन भी गद गद हो जाता है ! ऐसी ही कुछ छवियां कल जन्माष्टमी के पर्व पर मेरे अनुज चित्रकार /लैंडस्केप फोटोग्राफर / पूर्व प्रेस फोटोग्राफर - हिन्दुस्तान टाइम्स जयपुर /और वर्तमान में एल्युमनी मेंबर राजस्थान स्कूल ऑफ़ आर्ट कॉलेज जयपुर - मास्टर चन्दन सिंह राठोड ( हुकुम ) ने मुझे भेजी मेरे व्हाट्सअप पर !
वो कोई 65 से 70 छाया चित्रों का एक समूह था जिसे मैं एक पूरा फोटो एल्बम ही कहूंगा जो सिर्फ और सिर्फ मेरे पर ही केंद्रित होकर मास्टर चन्दन सिंह ने बीकानेर में मेरे आर्ट स्टूडियो योगेंद्र आर्ट एंड डिजाइनिंग स्टूडियो बीकानेर में मेरे साक्षात्कार के साथ लिए थे ! वर्ष मुझे याद नहीं आ रहा है पर शायद 2013 या 2014 की बात है , बात ही क्या अब तो एक कहानी है वो भी सच्ची और अचंभित करने वाली !
प्रेम और रिश्ते किस प्रकार मन मस्तिष्क को बांध देते है की उसमे फिर न तो शरीर का महत्व होता है और न ही भौगोलिक दूरियों का ! वर्ष 2008 में मैं जयपुर से बीकानेर आ गया था मेरा मास्टर ऑफ़ फाइन आर्ट करके ! पर पीछे कुछ अधूरा सा भी छोड़ आया था समय के तोड़ मोड़ के कारण ! उस पीछे छूटे में एक रिश्ता मौन रिश्ता मास्टर चन्दन सिंह का भी मुझसे छूटा था ! और समय ने उस छूटे हुए रिश्ते की कड़ी जोड़ी बीकानेर में ! मास्टर चन्दन सिंह एक अच्छा बाइकर भी है सो यायावर स्वभाव का धनि मास्टर चन्दन सिंह अपने मित्र जो की भतीजा है शास्त्रीय संगीत के महान गायक स्वर्गीय भूपेन हजारिका जी ( जिसका नाम मेरी स्मृति पटल से कही खो गया है इतने वर्षों में ) का , के साथ बीकानेर आया मुझसे मिलने ! मेरे लिए वो सरप्राइज ही था की एकदम से मेरा चन्दन मेरे सामने वो भी मेरे बीकानेर में !
जब चन्दन से बीकानेर में मिला तो हमेशा की तरह बिना कुछ कहे मेरे गले लगा और क़ाफी देर तक मौन रह कर मझे गले लगाए रखा ! मैंने भी पूछा क्या हुआ चन्दन ? पर चन्दन कुछ कह ने की स्थिति में भी नहीं था पर उसकी आँखे बहुत कुछ बयां कर रही थी उसके मन और स्नेह की स्थिति को जिसे वो मेरे गले लग कर भर लेना चाहता था !
फिर हम तीनो मेरे स्टुडिओ में आये चाय के साथ यात्रा का मूल कारण जाना ! वो था सिर्फ मुझसे मिलना और मुझे अपने साथ हमेशा के लिए रखने हेतु मेरी छाया चित्र और लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिये ! हमने सामान्य बात चित की या उसे मैं एक संवाद भी कहूं तो अतिश्योक्ति नहीं होगी ! दरसल चन्दन तैयारी कर रहा था किसी लम्बी यात्रा की और उस यात्रा के जरुरी सामान के लिए उसे मेरी वर्चुअल छवियों की भी आवश्यकता थी शायद ! तो मेरे संवाद करने के भाव का वीडियो भी ( चलचित्र ) ! ताकि समय समय पर वो उस छूटे हुए स्पेस को छवियों से भर सके अपने एकांत में ! ( क्यों की जयपुर में लगभग प्रतिदिन हम कभी आर्ट कॉलेज के आगे तो कभी जवाहर कला केंद्र में मिलते तो कभी एम आई रोड स्थित इंडियन कॉफ़ी हॉउस में और घंटो संवाद भी करते कला पर सामाजिक विषयों पर ! मैं चन्दन की जिज्ञासाओं को अक्सर शांत करता और उसकी जिज्ञासा उत्पन होती पुस्तकों को पढ़ने से ! )
हमने चाय के साथ हल्का नाश्ता किया फिर मास्टर चन्दन ने मेरी तस्वीरें ली और उसके दोस्त ने विडिओ भी बनायीं हमारे संवाद करते हुए की ! फिर मास्टर चन्दन में मुझसे अनौपचारिक परिचर्चा की अनेकों विषयों पर तर्कसंगत और उसे विडिओ में भी संकलित किया अपने कैमेरा से ! संवाद इतना लम्बा चला की कैमरा की मेमोरी डाटा ही फुल हो गया ! पर बात जारी थी क्यों की वो अनवरत भाव में थी और चन्दन उन पलों को समेटना चाहता था पूरा का पूरा ! जो स्वाभाविक था !
फिर मेरे घर में से माँ ने खाने के लिए आवाज दी हमें , तो हम तीनो घर में आये खाना खाया साथ में बैठकर और उसी श्याम को मास्टर चन्दन अपने मित्र के साथ अपनी यात्रा के अगले पड़ाव की और निकला ! मैंने मदद करनी चाही पर हुकुम ने आस्वस्त करदिया की अभी के लिए प्रयाप्त साधन है आगे की यात्रा के लिए !
मास्टर चन्दन की वो लम्बी यात्रा अभी पड़ाव लिए हुए है हिमाचल की वादियों में किसी पहाड़ी गाँव में ! वहां से अक्सर शानदार प्राकृतिक लैंडस्केप की छविंयां सोशल मीडिया के माध्यम से साझा भी करता है ! प्राकृतिक सुख की अनुभूति करवाने को !
कल जन्माष्टमी के पर्व पर मास्टर चन्दन सिंह ने एक दम से मुझे चकित कर दिया मेरी वो छवियां साझा करते हुए जिसे उसने कई वर्ष पूर्व ली थी मेरे स्टूडियो में और अब मुझे साझा करते हुए ये आभास भी करवा दिया है की कहीं कुछ अब पूर्ण हो गया है मेरे अनुज चन्दन के मन और विचार में ! उन छवियों को देख कर मैं वास्तव मे गद गद हूँ और शुक्रगुजार भी मास्टर चन्दन का , क्यों की उसने अपनी इस लम्बी यात्र के दौरान मुझे और मेरी यादों को संजोये रखा है और उसका प्रमाण कल उसके द्वारा भेजी गयी वे छवियां जो उसके एकांत में उसके साथ रही मेरी उपस्थिति का आभास करवाते हुए !
बात के धनि मास्टर चन्दन सिंह हुकुम आप की खम्मा घणी !
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Photography by Master Chandan Singh ( file Photo from His own photo album |
यहाँ कुछ छवियां आप के अवलोकन हेतु जिसे साझा किया था मेरे साथ, कल मेरेअनुज कलाकार मास्टर चन्दन सिंह ने !
yogendra kumar purohit
Master of Fine Art
Bikaner, INDIA
2 comments:
Art Critic Sir Sarvesh Bhatt leave this comment for this post in his own hindi words
[18/08, 7:18 pm] Yogendra Kumar Purohit: प्रिय योगेंद्र के पुरोहित जी
यह संस्मरण वास्तव में आत्मा को छू लेने वाला है। इसमें अतीत की स्मृतियाँ, मित्रता की गरिमा और कलात्मक संवाद का जो तानाबाना बुना गया है, वह अद्भुत है। मास्टर चन्दन सिंह ने कैमरे में सिर्फ़ आपका चेहरा या छवि नहीं कैद की, बल्कि आपके विचार, आपकी संवेदनाएँ और उस दौर के आत्मीय रिश्तों को भी सुरक्षित रखा। वर्षों बाद जन्माष्टमी जैसे पावन पर्व पर उनका उन तस्वीरों के रूप में लौटना मानो यह संदेश है कि सच्चे रिश्ते कभी बिखरते नहीं, वे समय और दूरी की दीवारें तोड़कर फिर से सामने आ खड़े होते हैं। यह अनुभव न केवल आपको गदगद करता है, बल्कि पाठकों को भी रिश्तों की गहराई और स्मृतियों की अमरता का अहसास कराता है। सचमुच, ऐसी स्मृतियाँ जीवन को अर्थवान और आत्मीय बना देती हैं।
शुभकामनायें
आपका,
सर्वेश भट्ट,
कला समीक्षक
मुंबई
बहुत शानदार
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