Saturday, April 18

Art Vibration - 377



A  Speech  On
Modern Art Of Bikaner

Seminar on Bikaner painting styles , by RAV BHIKAJI Society , Bikaner 2015
Last week I were received a phone call of very senior or respectable  writer of My City Bikaner , his name is Sir Bhawani Shankar vyas vinod ji, he was demanded to me a art speech on modern art of Bikaner actually he was wanted  a speech on my art journey for a seminar . he was  wanted to me , if I express to myself art achievements. But he was  gave me title of that speech that was Modern art of Bikaner . 

So as a honest artist of contemporary art I were judged for writing on modern art of Bikaner, I were started that speech writing with historical art work repost of sir A. H. Mular , he was lived  in Bikaner and after Sir Mular Bikaner was started modern art work in Bikaner. 

Myself Giving Speech on Modern art of Bikaner
In that speech I were leaved to report of  my art achievement of modern art but I did shared our Bikaner modern art or that’s modern artists through  my speech .

I were wrote  that in Hindi and on stage I were read that in very fast motion because I were wanted  to save time of myself or that event , Here that speech copy for your notice , I sure  you will translate that by good translator of our web world. Because I can’t  translate it in English with right words ,it is tuff for me so sorry .

Some visuals of that live art speech presentation of  myself  , For your notice or observation. 

 https://www.facebook.com/yogendra.purohit.7/posts/10205040810514603

1. short report of that event in Hindi 


मित्रों आज एक और प्रतिबंधन पूर्ण हुआ कला के लिए राव बीकाजी संस्थान की खातिर ! पिछले सप्ताह मुझे फ़ोन आया साहित्यकार भवानी शंकर व्यास विनोद जी का और उन्होंने बीकानेर की आधुनिक कला पर मुझसे एक टिपणी की मांग की विचार गोष्ठी के लिए ! आज राव बीकाजी सस्थान ने वो विचार गोष्ठी नरेंद्र सभागार में आयोजित की बीकानेर का कला वैभव : चित्रकला शीर्षक के साथ !
मैं मेरी शोधात्मक टिपणी आधुनिक कला पर लिख कर ले गया मेरे अलावा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित चित्रकार महावीर स्वामी जी , ने मिनिएचर पेंटिंग पर अपनी टिप रखी . साहित्यकार अशफाक कादरी जी ने उस्ता कला पर अपनी टिप रखी , पेंटर भोज राज जी ने ऐ एच मुलर स्कूल पर अपनी टिप रखी तो मुरली मनोहर के माथुर जी ने फैब्रिक आर्ट पर अपनी टिप रखी !
विचार गोष्ठी के अध्यक्ष थे डॉ महेंद्र खड़गावत जी , विशिष्ठ अतिथि थे महापौर बीकानेर श्री नारायण चोपड़ा जी अतिथि के रूप में डॉ राकेश किराडू और मुख्य वक्ता थे साहित्यकार भवानी शंकर व्यास विनोद जी और विचार गोष्ठी का सञ्चालन किया साहित्यकार आत्मा राम भाटी जी ने !
यहाँ मेरी लिखी और प्रस्तुत टिप आप के पठन और अध्ययन के लिए साथ में विचार गोष्ठी के कुछ दृश्य छाया चित्रों के जरिये आप के अवलोकन हेतु। … 

2. My speech on Modern art of Bikaner in HINDI ...

 

आधुनिक चित्रकला और मेरा शहर बीकानेर
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आधुनिक कला का अर्थ किसी भी विचार या कल्पना को स्वयं के स्वतंत्र प्रकटीकरण के यंत्र से अभिव्यक्त करना ! किसी विचार आयाम के साथ अभिव्यक्त करना ! वैसे समय का हर पल हमारे लिए नया और आधुनिक भाव लेकर आता है यही सृस्टि का नियम है अन्य था इतनी सारी संस्कृतियाँ हमारे इतिहास में नहीं मिलती जबकि हर संस्कृति का मुलभुत आधार एक ही है वो है रोटी कपडा और मकान !
बीकानेर में आधुनिक चित्रकला से प्रथम परिचय करने वाले चित्रकार थे सर एच . . मूलर , महाराजा गंगा सिंह जी के संगरक्षण में मूलर साहब ने बीकानेर में पहली बार तेल चित्रण पद्धति से बीकानेर को अवगत कराया ! मूलर साहब से पहले बीकानेर की चित्रकारी लोक कला , मथेरन कला , मिनिएचर कला यानी परंपरागत चित्रण शैली में ही व्यस्त थी पर मूलर साहब ने बीकानेर के कलाकारों के लिए एक नयी चित्रण पद्धति दी साथ में वेस्टर्न एनॉटॉमी का भी ज्ञान करवाया ! मूलर साहब से प्रभावित होकर बीकानेर के कलाकारों की एक पूरी खेप जो की आधुनिक कला से प्रभावित हुई , उन्होंने मुलर साहब की शागिर्दगी में यथार्थ शैली में चित्रण करना प्रारम्भ किया उनके अनुयायी रहे स्वर्गीय द्वारिका प्रसाद शर्मा , स्वर्गीय अलाइ बक्श उस्ता और अलाई बक्श उस्ता के सभी शागिर्द जिनमे पेंटर भोजराज सोलंकी , श्री हनुमान सुथार , स्वर्गीय सूरज सिंह पंवार , पृथ्वी सिंह राजपुरोहित , इन्दर सिंह राजपुरोहित , स्वर्गीय आशा राम गोस्वामी जी , क्रांति चन्द्र स्वामी व् कुछ अन्य बीकानेर के अज्ञात कलाकार अज्ञात इस लिए क्यों की मैं उनके नाम नहीं जानता !
आज बीकानेर की आधुनिक चित्रकला के लिए मैं कुछ नाम गिना सकता हूँ और जिन्होंने बीकानेर की आधुनिक कला के प्रथम प्रहरी अगर कहूँ तो अतिश्योक्ति नहीं होगी, इस क्रम में स्वयं स्वर्गीय महाराजा करणी सिंह जी, श्री आर बी गौतम साहब, स्व . प्रेम चंद गोस्वामी जी , स्व . रंजन गौतम साहेब , स्व . क्रांति चद्र स्वामी , श्री चन्द्र शर्मा जी , श्री हरी गोपाल हर्ष सन्नू जी , श्रीगोपाल व्यास जी और युवा कलाकरों में मास्टर मनीष शर्मा ,श्रीकांत रंगा, मालचंद पारीक , नविन स्वामी , नगेन्द्र किराडू , विवेक काकडा , अनुराग स्वामी , कमल किशोर जोशी , राधाकिशन शर्मा आदि !
बीकानेर को वास्तविक आधुनिक कला से पहला परिचय करवाया एच मूलर साहब ने और उनके तुरंत बाद बीकानेर के महाराजा करणी सिंह जी ने ! महराजा करणी सिंह जी के चित्र स्वतंत्र आधुनिक कला के सफल प्रमाण है क्यों की उनके चित्रो भाव प्रधान है आकृति प्रधान नहीं , सो उनके चित्र अत्यंत आधुनिकता लिए हुए है ! उन चित्रों का एक अच्छा खासा संग्रह लालगढ़ में संगृहीत है अवलोकन हेतु !
आधुनिक चित्रकला का विद्यार्थी हूँ सो ये कहाँ अच्छा लग रहा है इस मौके पर, कि एक बार मुझसे किसी ने पूछा की तुम्हारी ओकाद क्या है ? तो मेरे पास एक बहुत सटीक जवाब है की मै उस देश का वासिन्दा हूँ जहाँ के राजा भी चित्रकार रहे है और वो है मेरा देश बीकानेर ( आधुनिक समय में शहर बीकानेर ) …. !
आज समकालीन समय में बीकानेर की आधुनिक कला ने भी आधुनिकता को आत्मसात करते हुए विकास क्रम को जारी रखा है ! आज कला सम्प्रेषण संचार माध्यम से होने लगा है चित्रकला का क्षेत्र विकसित हो गया है आज आधुनिक समय में अधिुनिक कला किसी शहर या राज्य तक नहीं पुरे विश्व जगत तक पहुँच रही है इंटरनेट तकनीक के जरिये ! एक कलाकृति को ऑनलाइन अपडेट करने के साथ ही विश्व भर के कला रसिक एक साथ अपने घर या हैंडसेट पर कलाकारी की छवि देख सकते है और उस से प्रभावित होकर कला सवाद भी स्थापित करते है ! जिस से बीकानेर की आधुनिक कला विश्व के हर कोने तक पहुँच रही है और विश्व के प्रमुख कला रसिक अपनी टिप और टिकाये बीकानेर के आधुिक कलाकार तक पहुंचा राहे है ऑनलाइन प्रदर्शनी के जरिये ! कम समय , कम खर्च में अधिक से अधिक प्रदर्शन अधिक से अधिक कला परिचर्चा आधुनिक चित्रकला के सन्दर्भ में आधुनिक चित्रकला के जरिये !
इस बात को मै प्रमाणित करता हूँ , एक मास्टर ऑफ़ फाइन आर्ट होने के तौर पर क्यों की मैं प्रतिदिन इस प्रकार से बीकानेर से आधुनिक कला को पुरे विश्व के कला रसिकों तक पहुंचा रहा हूँ और मेरी ही तरह कुछ और आधुनिक चित्रकार बीकानेर से कला संवाद स्थापित कर रहे है और आधुनिक कला के फलक पर बीकानेर का नाम भी दर्ज करते जारहे है !
दृस्टि कोण से बीकानेर की आधुनिक चित्रकला और आधुनिक चित्रकार कही भी किसी भी पक्ष में पीछे नहीं है ! विपरीत परिस्थिति में भी आधुनिक चित्रकारी करना या उसके लिए जीना एक सच्ची जिद है और कहते है जो जिदी होते है वही जीत ते है …….
आधुनिक चित्रकार
योगेन्द्र कुमार पुरोहित
मास्टर ऑफ़ फाइन आर्ट
बीकानेर , इंडिया

Myself is  Collecting reward  for speech of  modern art of Bikaner  by RAV BIKAJI society . 




My art speech was proved to  my art education , dedication, promotion and modern creation too from Bikaner .
So I said  a speech on Modern art of Bikaner ..

Yogendra  kumar purohit
Master of Fine Art
Bikaner, INDIA

Tuesday, April 7

Art Vibration - 376



ART TRANSFORMING IS INTERSTING JOB


Myself  Drawing  In Pencil  ( Transforming  Job  )

Friend we all are art family member ,we  know about art ..art is a exercise of transfer to our inner  virtual visuals in form of real visuals . we all artist is expressing our inner sound and transfer to that in a creative form , that form can   music , dance , performance , instrumental performance , drama , sculpture , painting,  installation , research , and all kind of transformation  is form of art in our human life . 

Late Philosopher Plato  was told about it but he was said , we artist is doing copy to natural creation , that natural creation  can  natural live visuals or may be our own imaginational visuals of our inner side .  Sir Plato  Said we all artists are  just tool of art , we are nothing everything by God  so god is  one and only artist of our universe .yes I am agree with him but . when I read to INDIAN art philosophy , here our philosophers were gave freedom to artist for creation of his/her own  thought , and student of Plato late  philosopher Arastu was also accepted artist have own vision and freedom for change to creation for natural aesthetic feeling. 

Myself  painting In Color ( Transforming Job )

But one thing is fact we all artist are doing copy of our vision when we create our own conceptual art work on canvas . but I am not saying to that copy , I am saying to that , that is a exercise of transformation . we are transfer to our inner sound by line ,color, sound, body or play . ( it is medium of transformation of our inner sound  .) 

I am enjoying to this transformation job in art creation. It is giving freedom to artist and it can create more wide space in creation filed for a creative artist . a artist can give many visuals and form to one concept or idea by different mediums . 

This transformation of creation job is giving many idea and challenge to a creative artist  when artist  follow to this transformation job in art work creation . you know last eight years to I am continue busy in art work creation on a one concept . that is myself .
In this creation journey or transformation job  I have created up to 1600 visuals and it is continue with me about myself art journey . in this long journey all time I am transforming  my inner vision and visuals  on canvas . 

Myself  in Collage Painting ( Transforming Job )

Some time I were transferred my vision  by single  pencil after that in colors  or collage style and some more art forms . that all art forms are just a transformation of  my inner sound cum vision about myself art. I were taken challenged about transfer to  my vision  in different art form that was also transforming exercise by me , first was drawing ,  Drawing to I were transferred in color painting , Color painting to I were transferred in collage painting( paper cutting and pasting work )  its all exercises were gave me more capacity for creation or transformation to one concept  in different – different medium ,   I were enjoyed this job  or enjoying it today . because art concept is creating own job for a artist or that’s transformation is give a art work to society for there use or education + refreshment . 

Transformation job  create the presence of artist or creator  in our society or that creation can register to contemporary culture, thought , life style and time record for future culture in our nature ..

So here I said transformation job is interesting job …

Yogendra  kumar purohit
Master of Fine Art
Bikaner, INDIA

Thursday, April 2

Art Vibration - 375



MY CRAFT IS FLY IN SKY


Kite craft Stage - 1,2,3, and fly .........:)
Friends we have definition of art and craft  for our clear vision. Art is master peace of our concept  and craft is for use in our social life. Art have master piece and craft have mask production of  one master piece ..
You know I am master of Fine Art and here I am talking about craft ..so  you can thing what is this ? but don’t worry my friends I am clearing it for you why I am talking about craft at here .

We know every art start from our vision and that can get a right form or look from our manual work , that manual work we are complete to our hand so hand work is real craft of today . so every art work is very first a craft and then that can get a right stage of art and Design  like that . but in first that is only a craft .
So  my all manual creation is craft /art . this week once again I were created  a craft work a big craft work  by me . I did created a big size kite by paper or wood sticks . 

I know  you all know about kite because we all are participating  in our kite festival when  our country organize to this festival . In India we are celebrate to kite festival many time  in different cities or different  time . My home in Bikaner and this INDIAN city was founded before 528 years ago . so our Bikaner KING was started Kite festival on foundation day of Bikaner  that is Vedik Date according to Vedik Calendar of Hindu culture , we are calling to that Vedik date  AKHA TEEJ ..

Here in Bikaner I am flying  kite in sky from  my childhood age so I know the nature of air, kite, and thread + myself . you can say I am master in kite flying . ha 

But I am not only a kite flyer I am also a kite maker . From my childhood age to I were started  some extra ordinary kite making work by me , you can say that is  my own style for surprise to other kite flyer . 

I were always created or crafted big kite in different shape or color , you know kite making work need full consciousness , science of flying format, knowledge of kite making medium . time to time  I were learned it from other kites  and some from  myself exercise or thats result I have been created very big kite and I did flied that in sky successfully . 

In  my colony many kids know me as a big kite maker , they don’t know I am master of Fine art , not a professional kite maker  ..ha ha..

In past I were created big kite in shape of big black bird , snack , long kite , round kite ,  glider type kite  and some more designs I did applied on kite making craft . all were successful so that was gave me more confidence about  more big kite making craft. 

This week I were crafted one more kite for next month , because next month we will celebrate to our City foundation day AKHA TEEJ . this week I were created a big size  kite  by brown paper its size is 5X5 fit with tell its size is 5 X 9 fits . its total fits square  is 25 firs . 

Here some visuals of that kite for  your visit , I were shoot it when I were created it or crafted it ..

Today  my crafted  kite is ready for fly.

So here I said  my craft is fly in sky …

Some more information about  my kite craft work , its in Hindi ..i hope  you will notice it after translate to it ..

( मित्रों गुण वंशानुगत होते है ये बात प्रामाणिक है ! आदमी का मन बदल सकता है पर उसकी प्रवृति नहीं ये बात भी सोला आने खरी है ! इसका जीता जागता प्रमाण मै खुद हूँ ! अब आप सोचेंगे कैसे ? तो बताता हूँ ऐसे … आज मैंने पांच बाई पांच फुट की एक बड़ी पतंग खाकी कागज से बनाई है ! अब आप सोचेंगे की मै चित्रकार ओर पतंग बनाने वाला काम कैसे कर सकता हूँ ? हाँ मैंने ऐसा कई बार किया है विशाल काय पतंगे बनाने का शोक मुझे बचपन से ही था और मैंने कई बना कर उड़ाई भी लोगो को चकित भी किया ! वैसे पतंग बनाना बच्चों का काम नहीं उसकी अपनी एक विधि और विज्ञानं है जिसमे बल और गति के साथ भार जैसी विज्ञानं जुडी है ! तो यहाँ मैं ये राज आप से साझा करने जा रहा हूँ विज्ञानं और पतंग बनाने की विधि मुझे कैसे मिली ? आप कह सकते है की ये जन्म जात है मुझ मे ! मेरे पिताजी के स्वर्गीय नाना जी श्री खुमान चंद जी बोहरा रायपुर निवासी , रायपुर ( मध्य प्रदेश ) में सफल पतंग के हस्त कारीगर थे , उनका स्वयं का पतंग का कारोबार और कुछ खास किस्म की अनोखी पतंगो की डिज़ाइन मशहूर थी ! मेरे पिताजी के संग्रहण में एक कलात्मक पतंग की डिज़ाइन का फर्मा आज भी सुरक्षित है जो उन्होंने अपने हाथ से मोटे कागज को कटिंग कर के मेरे पिताजी को दिया था !
तो अब आप को ज्ञात हुआ मेरी वैज्ञानिक पद्धति से सटीक पतंग बनाने की कारीगिरी के बारे जो जन्म जात है मेरे साथ जिसे मूर्त रूप देते है यदा कदा मेरे हाथ … जय हो । )
 

 
Yogendra kumar purohit
Master of Fine Art
Bikaner, INDIA