36 HOURS DEDICATE
TO MADHUSHALA
Dr. HarivanshRai Bachchan , Literature person of IDNIA |
Kind your
information past year I were wrote 365 text visuals in Rajasthani language , I have shared about this visual art work by
text language on this blog . I am also living in Rajasthan so my mother tong is
Rajasthani , I were thought about a new exercise for translation work as a translator of Rajasthani languageafter read the invitation
of Geetanjali translation . I know
Geetanjali poem book and that’s poem is very big poem. That was Nobel prize
winner literature book of our Nation in world literature History. In same time I
were thought a name of a great poet Dr.
Harivansh Rai Bachchan Sir , and I were remembered his big poem MADHUSHALA , I were
searched that poem on online then I got some part of that poem . I were started
translation work with full patience or with dedication. kind your information that night I were read first time Madhushala poem as a
poem reader. I felt that was not only a poem , Madhushala is a institute of life struggle and that’s free way. So I
were selected that poem for translation .when I were translated 33 poem Pad ( one pad in four line’s group ) .
I were shared that online network for my
world art family . I were thought my translation work is complete for
Madhushala Poem ha ha . but that was time joke because when I were searched Madhushala
on google then a web page was showed only 33 pad of Madhushala . so I were
confused but very confident about translation work . but in next movement after
updated on online my senior artist friend and a good poet Mr. Arvind Vyas DUBAI
, informed me with good promotional words , he told me Purohit ji Madhshala is
a very big poem you have translate very
well but its not complete Madhushala , he said wait I am sending to you a right link of Madhushala for your translation work ,. That night he was my
big helper or a real guide as a real artist friend. He was posted me a link of
complete Madhushala , and after that I were not watched to my time watch, I were
leaved my pc in that night at 4 am. And next day I were started again
translation work or that day I were not got free time for other art work .but I were completed translation work of
Madhushala in 36 hours.that was tuf and challenging work for my vision . it was interesting that
translation work was gave me some brake .
After that translation
work I were updated on online to Madhushala and I were shared that poem to Dr.
Amitabh Bachchan sir. he is son of Dr. Harivansh rai Bachchan . I were shared
translated poem on His own blog www.bigb.bigadda.com today that is convert in @Srbachchan.tumblr.com .
After blog of Dr. Amitabh Bachchan Sir I were shared that translated poem with News
paper Denik Yugpaksh Bikaner , yougpash
is promoting here in our city to
Rajasthani Language so Editor Saxsena ji
was gave full respect to Madhushala and
to my translation work. Yougpaksh news paper was published to Madhushala in
many part by weekly column by that publication many Rajasthani writers
were noticed to my translation exercise or dedication of language promotion by
a visual artist. I were got many
comments and a special thanks from Dr. Amitabh Bachchan Sir on that 36 hours
dedicated work on Madhushala .
Here , for your reading
I am going to share to Translated Madhushala
Poem of Dr. Harivansh Rai Bachchan . because
my 36 hours dedicated to Madhushala…
डॉ. हरिवंश राय बच्चन जी की " मधुशाला" काव्य कृति का अनुवाद राजस्थानी भाषा मे, मेरा एक प्रयास ..
नशे रे भाव सु अंगूरों री बना लायो शराब,
जिव री जड़ी ,म्हारे हाथ सु ही पासू प्यालो ,
पेली भोग लगा लू थारो पछे परसाद जग पासी ,
सगला सु पेली थारी आव भगत करती म्हारी मधुशाला ||१ ||
तिस थने तो , संसार ने तपार निकाल लासु हाला .( शराब )
एक पग सु साकी बनर नाचसू लेर प्यालो ,
जून री मिठास तो थारे ऊपर कदेइ वार दी ही ,
आज सगळी दे देसु मै जाग पनार मधुशाला ||२ ||
जिव री जड़ी , तू म्हारी हाला है मै थारो तीसो प्यालो ,
खुद ने म्हारे मया भर थू बनजावे पीवन वालो ,
मै थने छल छलकावतो , मस्त मने पीर थू होतो ,
एक दूजे खातिर आज एक सार हां मधुशाला ||३ ||
भावुकता अंगूर गुच्छा सु खिंच कल्पना री हाला ,
कवी साकी बनर आयो है भर पणार कविता रो प्यालो
,कदी नई कण भर खली होवेलो लाख पिए ,दो लाख पिए ,
बाचन वालो है पीवन वालो ,पोथी म्हारी मधुशाला || ४ ||
मीठी भावनाओं री बोत मीठी रोज बनावु हूँ हाला ,
भरु हूँ इए मीठे सु म्हारे अंतस री तिस रो प्यालो ,
उठार कल्पना रे हाथा सु खुद ही पि जाऊं हूँ ,
खुद मै ही हूँ मै साकी , पीवन वालो ,मधुशाला || ५ ||
शराब खानों जावन ने घर सु चाले पीवन वालो ,
'किसे मारग मै जाऊ ? ' गप्तागोल मे है बो भोलो भालो ,
अलग अलग मारग बतावे सब पर मै ओ बताऊ हूँ ,
मारग पकडर थू एक चाले जा , मिल जासी मधुशाला || ६ ||
चालन ही चालन मया किती जून , हाय , गवाय नाखी !
दूर है हाल ',पण , केवे हरेक मारग बतावन वालो ,
हिम्मत नि की बधू आगे खानी कालजो नि की फिरू पाछो ,
म्हारे कर्म सु मने मोडर ,म्हासु दूर खड़ी है मधुशाला ||७ ||
मुंडे सु थू लगातार केतो जा मीठी , शराब ,मीठी हाला ,
हाथो सु चेतो करतो जा एक ललित कल्पित प्यालो ,
ध्योन करिए हा मन मे मीठी ,सुखकर , फूटरी साकी रो ,
और बधियो जा , जात्री , ना थने दूर लागसी मधुशाला || ८ ||
शराब पीवन री मनसा ही जद बन जावे हाला ,
होठो री उन्तावल मे ही जद छवि हो जावे प्याला ,
बने ध्यान ही करते -करते जद साकी साकार , भाईले ,
रेवे ना हाला , प्याला ,साकी ,थने मिलसी मधुशाला || ९ ||
सुण, कलकल , छलछल मीठे घड़े सु ढूलती प्यालो माया हाला ,
सुण , रुनझुन रुनझुन चलती बाँट ती मीठी साकीबाला ,
बस आय पोचिया , दूर कोणी कई , चार पोंडा चालनो है,
चहक रिया ,सुण ,पीवन वाला ,खुशबूदार है , ले ,मधुशाला || १० ||
जलतरंग बाजे है ,जद पुचकारे प्याले ने प्यालो ,
वीणा जक्जोरिजे ,चाले जद रुनझुन साकीबाला ,
बक झड़प मधु बेचन वाले री आवाज पखावज री करे ,
मीठे पणे सु मीठी खुशबु और बधावे मधुशाला || ११ ||
मेंदी मंडोडे नरम हाथो माथे माणिक मीठे रो प्यालो ,
अंगूरी नशों घाले सोनलिया रंग सु साकीबाला ,
पाग बेगनी ,चोगो बिलु डाट डेट पीवन वालो ,
इन्द्रधनुष सु होड़ लगावति आज रंगीली मधुशाला || १२ ||
हाथो मे आवन सु पेली नखरा दिखासी प्यालो ,
होठो माथे आवन सु पेली अदा दिखासी हाला ,
बोतबार मना करसी साकी आवन सु पेली ,
जात्री , ना घबराए , पेली मान करसी मधुशाला || १३ ||
लाल सुरा री धार लपट जीसी के ना दिया इने ज्वाला ,
फेनिल शराब है ना केदिया इने उर का छाला,
पीड नशों है इए शराब री पुरानी यादा साकी है ,
पीड मे आनंद जिकेरे , आवे बो म्हारी मधुशाला || १४ ||
बलती री ठंडी हाला जीसी जात्री , कोणी म्हारी हाला ,
बलती रे ठन्डे प्याले जिसा जात्री , कोणी म्हारो प्यालो ,
बलती सुरा जगते प्याले माया ,धडकते कालजे री कविता है ,
बलन सु भी भय भीत जीको नई होवे , आवे बो म्हारी मधुशाला || १५ ||
भेवती हाला देखि , देखो लपटा उठाती हमें हाला ,
देखो प्यालो अबे छुव्ते ही होठ बालन वालो ,
'होठ नई ' सगलो सरीर सरीर ,पण पीवन ने दों टोपा मिले
'इसा मधु रे दीवाना ने आज बुलावति मधुशाला || १६ ||
धर्मग्रन्थ सगला बाल नाखीया है , जीके रे अंतस री ज्वाला ,
मिन्दर , मस्जिद ,गिरजे सब ने तोड़ चुक्यो बो मतवालों ,
पंडित , मोमिन , पादरियों रे फंदों ने जीको काट चुक्यो ,
कर सके है आज बीरो आव भगत म्हारी मधुशाला || १७ ||
उन्तावाले होठो सु जीके ,हाय , नई चूमी हाला ,
जोश -बिना काँपे जीके , हां नई छुयो मधु रो प्यालो ,
हाथ पकड़ शर्माव्ती साकी ने खने जीके नहीं खिंच्यो ,
धिन्गाने ही सुखादि जून री बीए मीठी मधुशाला || १८ ||
बणे पुजारी प्रेमी साकी , गंगा जळ पावन हाला ,
रवे फेरतो एकसार गति सु मधु रे प्यालो री माला ,
"
और लिए राख, और पिए राख , इए ही मन्त्र रो जाप करे
'मै शिव री मूर्ति बन बेठु , मंदिर होवे आ मधुशाला || १९ ||
भाजी ना मंदिर माया घंटी , चढ़ी कोणी मूर्ति माथे माला ,
बेठो आप रे भवन मौजिन देर मस्जिद रे ताला,
लुटिया खजाना नरपतियो रा ढही गढ़ों री भीत्या ,
रेवे मुबारक पीवन वाला , खुली रेवे आ मधुशाला || २० ||
बड़ा बड़ा मीटिया इयो , एक न होवेलो रोवन वालो ,
होजवे सुन सान महल बे , जठे थिरके सुरवाला ,
राज उन्धा हो जावे , भूपों री भाग्य सुलक्ष्मी सु जावे ,
जमियोड़ा रेसी पीवन वाला ,जगा बनसी मधुशाला || २१ ||
सगळा मिट जासी , बनियोड़ो रेसी सुन्दर साकी, यम काला,
सुख्ग्या सगळा रस ,बनियोड़ा रेसी ,पण , हलाहल ओ 'हाला ,
धूम धाम ओ ' चहल पहल रा थोड सगळा सुनसान बणिया,
जगा बनासी लगातार मरघट ,जगा बनासी मधुशाला || २२ ||
भूरो सदा केलाइय्जजग मे बांको , मद चंचल प्यालो ,
छेल छबीलो , रसियो साकी , अलबेलो पीवन वालो ,
पते कठे सु , मिठो ओ ' जग री जोड़ी ठीक कोणी ,
जग जीर शिर रोजिनेरा , घडी घडी , पण रोज नवी मधुशाला || २३ ||
बिना पीया जीको मधुशाला ने भुन्ड़ो केवे , बो है मतवालों ,
पीया पछे तो बिरे मुंडे माथे पड़ जासी तालो ,
दास विद्रोहियों दोनु मे है , जित सूरा री ,प्याले री ,
दुनिया जीतन वाली बनर जग माया आई म्हारी मधुशाला || २४ ||
हरो भरो रेवे मदिरालय , जग माथे पड़ जावे पालो ,
बठे मुहरम रो दुख छावे , अठे होली री ज्वाला ,
स्वर्ग लोक सु सीधी उतरी धरती माथे ,दुःख कई जाने ,
पढ़े मर्सिया दुनिया सगळी , ईद मनावति मधुशाला || २५ ||
एक साल मे , एक बार ही जगे है होली री ज्वाला ,
एक बार ही लागे बाजी , जागते दीपों री माला ,
दुनियाआलो , पण , कोई दिन मदिरालय मे आर देखो ,
दिन मे होली , रात दिवाली , रोज मानवती मधुशाला || २६ ||
नई जोने कुन , मिनख आयो बनर पीवन वालो ,
कुन अनजोन बीए साकी सु जीके दूध पाय दियो ,
जून पार मिनख पीर मस्त रेवे , इए कारण ही ,
जग माया आर सब सु पेली पायी बीए मधुशाला || २७ ||
बणी रेवे अंगूर लतावा जिकेसू मिले है हाला ,
बणी रेवे बा मिटी जिकेसू बने है मधु रा प्याला ,
बणी रेवे बा धीमी लालसा धाप्नो जीकी ना जाने ,
बनियोड़ा रेवे ऐ पीवन वाला ,बणी रेवा आ मधुशाला ||
२८ ||
ठीक ठाक समझो मने , ठीक ठाक रेवे जे साकीबाला,
मंगल और अमंगल समझे मस्ती मे क्या मतवालों ,
भाईलो, म्हारी तबियत ना पूछो आर , पण मधुशाला री ,
केया करो "जय राम " न भीलर , केया करो जय मधुशाला || २९ ||
सूरज बने मधु रो खरीदार , सिन्धु बने गड़ो, पानी हाला ,
बादल बण बण आया साकी , जमीन बनरी मधु रो प्यालो ,
झड़ी लगार बरसे मदिरा रिम झिम , रिमझिम रिमझिम करपनार ,
साथी , विटप , घणे जंगल मे पियु , बिरखा रुत होवे मधुशाला || ३० ||
तारे जेडी मणियो सु सजियोड़ो आकाश बण जावे मधु रो प्यालो ,
सीधो कर परार भर दियो जाय बीमे समुद्र पानी हाला ,
मज्ञल्तल्र्स समीकरण साकी बनर होठो माथे छलका जावे ,
फेलियोड़ा है जिका सागर तट सु विश्व बणे आ मधुशाला ||
३१ ||
होठो माथे होवे कोई भी रस जीभ माथे लागे हाला ,
भार होवे कोई हाथो मे लागे राखोड़ो है प्यालो ,
हरेक सूरत साकी री सूरत मे बदल जावे ,
आँख्या रे आगे होवे कई भी , आँख्या मे है मधुशाला || ३२ ||
पोधा आज बन्या है , साकी लेर लेर फूलो रो प्यालो ,
भरियोड़ी है जीके माया पिरमल -मीठी -सुरिभत हाला ,
मोंग मोंगर भंवरो रा दल रस री शराब पीवे है ,
झूम झपक मद - झंम्पित होवे , बाग़ क्या है मधुशाला || ३३ ||
प्रीत रो रस तर साकी जिसों , प्रीत मंजरीको रो है प्यालो ,
ढुल री है जिकेरे बांडे खुसबू दार सोरभ री हाला ,
छक जिकेने मतवाली कोयल कुक रई डाली डाली ,
हर मधु रुत मे अमराई मे जाग जावे मधुशाला || ३४ ||
भर भर है अनिल पावे बनर मधु -मद - मतवालो,
मूंगा मूंगा नवा पता ,ताजा ,नवी डाल्या,वल्लरिया ,
छक छकर , झुक झुकर झूम री है मधुबन माया है मधुशाला || ३५ ||
साकी बनर आवे ,दिनुगे जद अरुणा नमी वालो ,
तारक -मणि -घडीयोड़ी चादर देर भाव धरा लेवे हाला ,
बिना गणित री किरणों सु जिकेने पीर , पांखी पागल होर गावे ,
हरेक भोर मे पूरी प्रकृति मे समुली खुलती मधुशाला || ३६ ||
उतर नशो जद बीरो जावे , आवे है सिंज्या बाला ,
बोट पुराणी , बोत नशीली नाज ढला जावे हाला ,
जून रा संताप शोक सब इने पीर मिट्जावे,
सूरा -सुप्त होवे मद लालची जगती रेवे मधुशाला || ३७ ||
अंधारो है मधु बेचन वालो , सुन्दर साकी है शशि बाला ,
किरण किरण मे जीकी छाल्कावे जाम जुम्हाई री हाला ,
पीर जिकेने चेतो गवावन लागे है झपकी ,
तारक दल सु पीवन वाला , रात कोणी है मधुशाला || ३८ |
कोई खानी मै आँख्या फेरु , दिखे खाली हाला ,
कोई खानी मै आँख्या फेरु , दिखे खाली प्याला ,
कोई खानी मै झाखु , मने दिखे खाली साकी ,
कोई खानी मै झाखु , दिखे मने खाली मधुशाला || ३९||
साकी बन मुरली आई सागे लिए हाथ मे प्यालो ,
जीके माया बा छाल्काव्ती लायी होठो -सुधा -रस री हाला ,
योगिराज कर संगत बेरी नटवर नागर केवाइजिया ,
देखो किसा किसा ने है नाच नाचाव्ती मधुशाला || ४० ||
बजावन वालो बनर मधु रो बेचन वालो लायो सुर- सुमधुर -हाला ,
रागनिया बन साकी आई भर पनार तारो रो प्यालो ,
बेचन वाले रे इशारे माथे दोड़ लयो , आलापों में ,
पान करावति सुनन वालो ने , झनकती विना मधुशाला || ४१ ||
चित्र कार बन साकी आवे लेर कुची रो प्यालो ,
जीके मया भर पाक करतो बो घना रस -रंग हाला ,
मन रा मांडना जिका ने पि -पीर रंग -बिरंगा हो जावे ,
चित्र पटी माथे री है एक मनोहरी मधुशाला || ४२ ||
घना काले अंगूर लता सु खीच खीच परर आ आवे हाला ,
अरुण -कमल -नरम कलियों री प्याली ,फूलो रो प्यालो ,
लम्बा हिंडा सकी बन बन मानिक मधु सु भर जावे ,
हंस मद मस्त होजावे पि पीकर मानसरोवर मधुशाला ||४३ ||
बर्फ जिया अंगूर लता फेली , बर्फ रो पानी है हाला ,
चंचल नदिया साकी बनर ,भरे लहरों रो प्यालो ,
कोमल कठोर करो माया ढोलती रोज चाले ,
पीर खेत खड़ा लहरावे , भारत पावन मधुशाला || ४४ ||
धरती पर सुता रे कालजे रे खून री आज बना खुनी हाला ,
वीर योधा रे माथे ने हाथो मया लेर प्यालो ,
घनी दयावान साकी है आज बनी भारत माता ,
आजादी है तरसती कालिख बलि री देवी है मधुशाला || ५४ ||
दुत्कारियो मस्जिद मने आकर की तू है पीवन वालो ,
ठुकरायो ठाकुर द्वारे देखा हाथेली माथे प्यालो ,
कथे थिकोनो मिलतो जग मे बेचारे अभागे काफिर ने ?
आसरो देवन वाली बनर जे नई अप्नावती मधुशाला || ४६ ||
जात्री बनर मै घूम रियो हूँ ,सगळी जगा मिले हाला ,
सब जगा मिल जावे साकी , सब जगा मिले प्यालो ,
मने ठेरने रो , मिले कोणी मस्जिद , मिल जावे मधुशाला || ४७ ||
सजे ना मस्जिद और नमाजी केवे है अलाताला ,
सजधजर , पण , साकी आवे , बन ठनर पीवन वालो ,
शेख ,कठे तुलना हो सके मस्जिद री मदिरालय सु ,
दाडी रांड है मस्जिद थारी सदा सुहागन मधुशाला || ४८ ||
भाजी नफीरी और नमाजी भूल गयो अलाताला ,
आफत आई , पण चेतो रयो सुरा माया मग्न रियो पीवन वालो ,
शेख , भूडो मत मान इने , साफ़ केवु तो मस्जिद ने ,
हाल युगों ताई खेलावेली चेतो लगाए मधुशाला || ४९||
मुसलमान ओ 'हिन्दू है दो , एक , पण , बियारो प्यालो ,
एक , पण , बियारो मदिरालय , एक , पण, बियारी हाला ,
दोनु रेवे एक नई जीते ताल मंदिर मस्जिद मे जावे ,
बैर बधावे मंदिर मस्जिद मेल करावति मधुशाला || ५० ||
कोई भी होवे शेख नमाजी या पंडित जपे माला ,
बैर भाव चाये जीतो होवे मदिरा सु राखन वालो ,
एक बार बस मधुशाला रे आगे सु होर बो निकले ,
देखू कियो झाल ना लेवे पलो बीरो मधुशाला || ५१ ||
और रसों मे स्वाद बीते ताई , दूर जीभ ताई है हाला ,
फिन्ग्रिज नि ले सब पात्र जीते ताई ,आगे प्यालो ,
कर ले पूजा शेख , पुजारी जीते ताई मस्जिद मंदिर मे ,
घूँघट रो पट खोल ना जीते ताई झांक री है मधुशाला || ५२ ||
आज कर रियो परहेज जगत , पण , काल पीनी पाडसी हाला ,
आज करे मनाही जगत पण काल पिनो होसी प्यालो ,
होवन दो पैदा मद रो महमूद जगत माया कोई ,फेरु ,
जठे अबार है मंदिर मस्जिद बठे बनेली मधुशाला || ५३ ||
हवन आगि सी धधक री है मधु री भटी री लपटा,
ऋषि जिया ध्यान लगार बेठो है हरेक मंदिर पीवन वालो ,
मुनि कन्याओं जिया मधु घडो लेर घुमती साकीबालाए ,
कोई तपोबन सु क्या कम है म्हारी पावन मधुशाला || ५४ ||
सोम सूरा पुरखा पिवता था , आपा केवा बिने हाला ,
ध्रोंन घडो जिकेने केता था , आज बो मधुघडो आला ,
वेदों वाली आ रित ना छोडो वेदों रा ठेकेदारों ,
युग युग सु पुजिज्ती आई नई कोणी आ मधुशाला ||
५५ ||
बाही वारुनी जीकी थी सागर मथिजर निकली अबे हाला ,
रंभा री ओलाद जगत मे जाणिजे ' साकीबाला '
देवता अदेवता जीके ने ले आया , संत महंत मिटा देसी ,
कीमे कितो दम ख़म , इए चोखितरे समझावे मधुशाला || ५६ ||
कदी ना सुन पड़े इने , हां , छुय ली म्हारी हाला ,
कड़ी ना कोई कई केवे , बीए ओंठो कर दियो प्यालो ,
सगळी जाती रा लोग अथे सागे बेतार पीवे है ,
सौ सुधारको रो करे है कोम एकली मधुशाला || ५७ ||
श्रम , कष्ट,दुःख सब भूल परार पि हाला ,
सबक बड़ो थू सिख चुक्यो जे सिख्यो रेव्नो मतवालों ,
धिन्गाने ही बनता जावो हो हिरजन थू तो मधुजन ही चोखो ,
ठोकर मारे हीर मंदी वाला ,पलक बिछावे मधुशाला || ५८ ||
एक तरेह सु सब रो स्वागत करे है साकीबाला ,
अज्ञ विज्ञ मे है क्या अंतर हो जावे जने मतवालों ,
रंक राव माया भेद करियो है कदी नई मदिरालय मे ,
समय वाद री पेली प्रचारक है आ म्हारी मधुशाला || ५९ ||
बार बार मै आगे बढ़ आज नि मांगी हाला ,
समझ ना लिया इसु मने थे आम पीवन वालो ,
होवे तो लेवन दो ऐ साकी दूर वाले पेलडे संकोचो ने ,
म्हारे ही सुरों सु फेर सगळी गूंज उठ्सी मधुशाला || ६० ||
काल ? काल माथे भरोसो कद करे है पीवन वालो ,
हो सके काल हाथ जड़ जीके बार बार आज उठा प्यालो ,
आज हाथ मे थो , जीको खोयो ,काल रो किसो भरोसो है ,
काल ही होवे ना मने मधुशाला काल नीच री मधुशाला ||६१ ||
आज मिल्यो मोको , जने फेर मै क्यों ना छकू जी-भर हाला ,
आज मिलियो मोको , जने फेर क्यों ना ढाल ना लू जी-भर प्यालो ,
छेड़छाड़ म्हारे साकी सु आज ना क्यों जी-भर कर लूँ ,
एक बार ही तो मिलनी है जून री आ मधुशाला ||६२ ||
आज जीवतो बनालो , प्रिय सी , थारे होठो रो प्यालो ,
भर लो, भर लो , भर लो इमे ,जवानी रे रस री हाला ,
और लगार म्हारे होठो सु भूल हटानो थू जावे ,
अथक बनू मै पीवन वालो , खुले मिलन री मधुशाला || ६३ ||
शुभ मुख थारो ,फुत्रो मुखड़ो ही ,मने कंचन रो प्यालो ,
धुल री है जीके मे मानिक डोळ मधुर खुशबुदार हाला ,
मै ही साकी बनू ,मै ही पीवन वालो बनू ,
जठे कठेई भील बेठा मै थू बाही बन जावे मधुशाला || ६४ ||
दो दिन ही मधु मने पार उफत गी साकी बाला ,
भर पनार अबे खिसका देवे है बा म्हारे आगे प्यालो ,
नाज , अदा , अंदाजो सु अबे , हाय पावनो दूर हुयो ,
अबे तो कर देवे है खाली फर्ज -अदाई मधुशाला || ६५ ||
छोटे से जून माया कितो प्रेम करू , पि लूँ हाला ,
आवन रे सागे ही जगत मे गिनिजियो जवान वालो ,
आवभगत रे सागे ही विदाई री होव्ती देखि तयारी ,
बंद लागी होवन खुलते ही म्हारे जून री मधुशाला || ६६ ||
कई पिनो , बिना राफड ना जीते ताई ढालियो प्यालो माथे प्यालो ,
कई जीनो , बेफिक्री ना जद ताई सागे रेवे साकीबाला ,
गवावन रो भय , हाय , लागियोड़ो है पावन रे सुख रे लारे ,
मिलन रो आनंद ना देवे मिल्परार भी मधुशाला || ६७ ||
मने पावन ने लाया हो ईति थोड़ी- सी हाला ,
मने दिखावन ने लाया हो एक ओइज छिछ्लो प्यालो ,
ईति सी पीर जीवन सु चोखो समदर री तिस लेर मरू ,
सिन्धु -तृषा दी केन घडर ,बिंदु बराबर मधुशाला || ६८ ||
कई कवे है , राई कोणी अबे थारे हाथो मे हाला ,
कई केवे है , अबे ना चालसी मादक प्यालो री माला ,
थोड़ी पीर तिस बढ़ी तो लारे नई कई पीवन खातिर ,
तिस बुजावन ने बुला परार तिस बधाव्ती मधुशाला || ६९ ||
लिखियोड़ी है भाग मे जीती बस बीती ही पासी हाला ,
लिखियोड़ो है भाग मे जिसों बस बिसो ही पासी प्यालो,
लाख पटक थू हाथ पग , पण इसु कद कई होने रो ,
लिखियोड़ी भाग मे जीकी थारे बस बाही मिलसी मधुशाला || ७० ||
कर ले , कर ले कंजूसी थू मने देवन मे हाला ,
दे ले ,दे ले थू मने बा टूटयो फुट्यो प्यालो ,
मै तो सबर इए पर करू , थू लारे पछतासी,
जद ना रेसू मै, जने म्हारी याद करसी मधुशाला || ७१ ||
चेतो मान रो , अपमानो रो छोड़ दियो जद पि हाला ,
अहम् भूल्यो , आयो करपनार मै मिटटी रो प्यालो ,
साकी री अंदाज भरोडी झिडकी मे कई अपमान धर्यो ,
दुनिया भर री ठोकर खार मिली मने मधुशाला || ७२ ||
थोड़ी , छोटी , पल मे बिखरान वाली , दोरी मिनख मिटटी रो प्यालो
भरियोडी है जीके रे माया कटु - मधु जून री हाला ,
मौत बनी है अखड़ साकी आप रा शत शत हाथ फेला ,
काल मजबूत है पीवन वालो संसरति है आ मधुशाला ||
७३ ||
प्याले जिसों गढ़ म्हाने केन ही भर दि जून री हाला ,
नाशो कोणी भायो , धलियो मोह ले लेर महू रो प्यालो
जद जून री पीड उठे बिने दबावों प्याले सु ,
जगती सु पेली साकी सु जूझ रई है मधुशाला || ७४ ||
आपने अंगूरा सु सरीर माया मोह भर ली है हाला ,
कई केवो हो , शेख , नरक मे मोहने तपासी ज्वाला ,
जने तो मदिरा खूब खिचसी और पीसी भी कोई ,
मोहने लून री ज्वाला माया भी दिख पडसी मधुशाला || ७५ ||
यम आसी लेवन ने जद , जने खूब चालसू पि हाला ,
पीड, आफत , कष्ट नरक रा कई समझ सी मतवालों ,
क्रूर , लकड़ ,नीच , सुगली सोच ,अन्यायी यमराजो रा ,
लठ री जद मार पड़ सी ,आड़ करसी मधुशाला || ७६ ||
जे इए होठो सु दो बात प्रेम भरियोड़ी करती हाला ,
जे इए खाली हाथो रा जी पल भर बहलाव्तो प्यालो ,
नुक्सान बता ,जग, थारी कई है , धिन्गाने मने बदनाम ना कर ,
म्हारे टूटोडे हिवडे रो है बस एक रम्तियो मधुशाला || ७७ ||
यान नई आवे दुखड़े रो जीवन इन खातिर पिलु हाला ,
जग चिन्तावा सु रेवन ने मुक्त , उठा लू हु प्यालो ,
शौक , साध रा और स्वाद रा हेतालू पीया करे है ,
पण मै बो रोगी हूँ जीके री एक दवा है मधुशाला || ७८ ||
लुढ़कती जावे है दिन दिनोदिन प्रणयनी जून री हाला ,
फुटतो हुवो जावे दिन दिनोदिन सुभगे म्हारो तन प्यालो ,
रिसोनो हो रियो माह्सू दिन दिन जवानी रो साकी ,
सुक री है दिन दिन सुन्दरी ,म्हारी जून मधुशाला || ७९ ||
यम आसी साकी बनर सागे लासी काली हाला ,
पीर होश मे फेर आसी सुरा -विसुध ओ मतवालों ,
ओ लारलो अचेतो , लारलो साकी , लारलो प्यालो है ,
जात्री , प्रेम सु पिए इने फेर ना मिले ली मधुशाला || ८० ||
ढुल री है सरीर रे घड़े सु , सागे वाली जून हाला ,
चिठ्ठी मोत री लेर जद लारलो साकी है आवन वालो ,
हाथ छुवन मूल्या प्याले रो ,स्वाद सूरा जीभ भूले ,
कानो माया थू केवती रये , मधु रो प्यालो मधुशाला || ८१ ||
म्हारे होठो माथे होवे लारली चीज ना तुलसीदल प्यालो ,
म्हारी जीभ माथे होवे लारले चीज ना गंगा जल हाला ,
म्हारे मरोड़े सरीर लारे चालन वालो याद इने राखिया,
राम नाम है साचो ना केया , केया साची मधुशाला || ८२ ||
म्हारे मरोड़े सरीर माथे बो रोवे , जीके रे आंसू माया होवे हाला ,
आह भरे बो , जीको होवे सुरभित मदिरा पीर मतवालों ,
देवे मने कंधो जीके रे पग मद डगमग होव्ता हो ,
और बलु बीए ठोड जठे कदी रियो हो वे मधुशाला || ८३ ||
और चिता माथे नाखिजे पता ना घ्रित रो , पण प्यालो ,
कंठ बांधिजे अंगूर लता माया बिच माया ना पानी होवे , पण हाला ,
प्राण सु प्यारा जे श्राद करे थू तो इया करिए ,
पीवन वाला ने बुलापरार खुला दिए मधुशाला || ८४ ||
नाव जे कोई पूछे तो , केवे बस पीवन वालो ,
काम ढालनो , और ढालनो सब ने मदिरा रो प्यालो,
जात प्रिये , पूछे जे कोई केह दिए दिवानो री ,
धर्म बताये प्यालो री ले माला जपणा मधुशाला ||८५ ||
खबर हुयी है यम आवन वालो है लेर आपरी काली हाला ,
पंडित आपरी पोथी भूल्यो , साधू भुगयो माला,
और पुजारी भूल्यो पूजा , ज्ञान सगलो ज्ञानी भूल्यो ,
पण ना भूल्यो मर पनार भी पीवन वालो मधुशाला || ८६ ||
यम लेर चाले है मने तो , चालन दे लेर हाला ,
चालन दे साकी ने म्हारे सागे लिए हाथ मे प्यालो ,
स्वर्ग , नरक या जठे कठेई भी थारो जी होवे लेर चाल ,
ठोड सगला है एक जेड़ा सागे रेवे जे मधुशाला || ८७ ||
पाप जे पिनो , समदोषी फेर तिनु -साकी बाला ,
रोज पावन वालो प्यालो , पि जावन वाली हाला ,
सागे इयाने लेर चाल म्हारे न्याय ओइज केवे है ,
कद जठे मै हूँ ,करी जावे कद बठेई मधुशाला || ८८ ||
शांत सकी है हाल ताई , साकी , पीर किसी उर री ज्वाला ,
और , और री रटन लगाव्तो जावे हरेक पीवन वालो ,
किती इछावा हरेक जावन वालो छोडर अठे है जावे ,
किता अरमानो बनर कब्र खडी है मधुशाला || ८९ ||
जीके हाल मै चाव तो थो , बा ना मिली मने हाला ,
जीको प्यालो मै मांग रियो हो बो ना मिलियो मने प्यालो ,
जीकी साकी रे लारे मै थो दिवानो ,ना मिली साकी ,
जीके रे लारे मै थो पागल , हो कोणी मिली बा मधुशाला || ९० ||
देख रियो हूँ म्हारे आगे कद सु मानिक जीसी हाला ,
देख रियो हूँ म्हारे आगे कद सु कंचन रो प्यालो ,
बस हमें पायो , केर केर कद सु दोड़ रियो इरे लारे ,
पण राई है दूर कोर -जीसी महासू म्हारी मधुशाला ||९१ ||
कदी निराशा रो तम घिरे , लुक जावे मधु रो प्यालो ,
लुक जावे मदिरा रो आभो , लुक जावे साकी बाला,
कदी उजालो आशा करर प्याली फेर चमक जावे ,
लुक मिचनी खेल री है महासू म्हारी मधुशाला || ९२ ||
आ आगे ' केर कर ले लारे कर लेवे साकी बाला ,
होठ लगाने रो केर हर बार हटा ले प्यालो ,
कोणी मने ध्यान कथे ताई आ मने ले जासी ,
बढ़ा बढ़ार मने आगे ,पाछी हटती ,अधुशाला || ९३ ||
हाथो मे आवन आवन मे हाय तिसल जावे प्यालो ,
होठो माथे आवन आवन माय हार धुल जावे हाला ,
दुनिया वालो , आर देखो म्हारी किस्मत री खूबी देखो ,
रह रह जावे है बस मने मिलते मिलते मधुशाला || ९४ ||
काम री नई है जने ,होय जावे गुप्त नई फेर क्यों हाला ,
काम री नई है जने , होय जावे नई गुप्त नई फेर क्यों प्यालो ,
दूर ना इति हिम्मत हारू , खने ना इति की पालू ,
धिन्गाने ही मने दोडावे मरु माया मिरग जल बनर मधुशाला || ९५ ||
मिले ना ,पण , ललचा ललचार क्यों उन्तावल करावे है हाला ,
मिले ना , पण , तरसा तारसार क्यों ताड्पावे है प्यालो ,
हाय , नियति री डोरी लेखनी माथे माथे खोद गी ,
दूर रेसी मधु री धारा , खने रेसी मधुशाला || ९६ ||
मदिरालय मे कदे सु बेठो , पि ना सकियो हाल ताई हाला ,
मनसा रे सागे भरू हु कोई पण उलट देवे प्यालो ,
मिनख री ताकत रे आगे कमजोर भाग्य , सुनियो स्कुल मया ,
'भाग्य ताकतवर , मिनख कमजोर ' रो पाठ पढ़ावति मधुशाला || ९७ ||
किस्मत मे थी खाली खपरेल , जोय रियो थो प्यालो ,
जोय रियो थो मै मर्ग नयनी , किस्मत मे थी मर्ग छाला ,
किन आपरो भाग्य समझन मे ,म्हारे जिसों धोखो खायो ,
किस्मत माया थो खाली घडो और मसान , खोज रियो थो मधुशाला || ९८ ||
बीए प्याले सु प्रेम मने जीको दूर हथेली सु प्यालो ,
बीए हाला सु लगाव मने जीकी दूर होठो सु है हाला ,
प्रेम नई मिलन मे है मिलन रे सपना माया ,
पा जातो जद , हाय , ना इति लाडली लागती मधुशाला || ९९ ||
साकी रे खने है थोड़ी सी श्री , सुख , धन री हाला ,
सगलो जग है पीवन ने उताव्लो लेर लेर किस्मत रो प्यालो ,
रेल ठेल कई आगे बढ़ता , निरा सारा दबर मरता ,
जून रो संघर्ष कोणी है , भीड़ भरोडी है मधुशाला || १०० ||
साकी , जद है खने थारे इति थोड़ी सी हाला ,
क्यों पीवन री इच्छा सु , करती सब ने मतवाला ,
मोह पिस पिसर मरो हो ,थू लुक लुकर मुल्के है ,
हाय , मोहरी पीड सु है हरकत्यो करती मधुशाला || १०१ ||
साकी, मर खापर जे कोई आगे कर सक्यो प्यालो ,
पि पायो खाली दो टोपों सु ना ज्यादा थारी हाला ,
जून भर रो , हाय , मेहनत लुट ली दो टोपों,
भोले मिनखाने ठगन खातिर बनी है मधुशाला || १०२ ||
जीके मने तीसो राख्यो बनियोड़ी रेवे बा भी हाला ,
जीके जून भर दोडायो बनियोड़ो रेवे बो भी प्यालो ,
मतवालों री जीभ सु है कदी निकले दुर्सास नई ,
दुखी बनायो मने जीके सुखी रेवे बा मधुशाला || १०३ ||
नई चाऊ , आगे आर खोस लू ओरो री हाला ,
नई चाऊ , धका देर , खोसू ओरो रो प्यालो ,
साकी ,म्हारी और न देख मने थोड़ो भी मलाल नई ,
इतो ही क्या कम आँख्या सु देख रियो हूँ मधुशाला || १०४ ||
मद , मदिरा , मधु , हाला सुन सुनर ही जद हूँ मतवाला ,
कई गति होसी होठो रे निचे आसी प्यालो ,
साकी , म्हारे खने ना आये मै गेल्लो हो जाउन्ला,
तीसो ही मै मस्त , मुबारक होवे थने ही मधुशाला || १०५ ||
कई मने जरुरत है साकी सु मांगू हाला ,
कई मने जरूरत है साकी सु चाऊ प्यालो ,
पीर मदिरा मस्त होयो तो प्रेम कियो कई मदिरा सु !
मै तो पागल हो जाऊ हूँ सुन लू जे मधुशाला || १०६ ||
देवेन रो जीको मने केयो थो दे कोणी सकी मने हाला ,
देवन रो जीको मने केयो थो दे कोणी सकियो मने प्यालो ,
समझ मिनख री कमजोरी मै केया नई कई भी करतो ,
पण खुद ही देख मने अबे शरमा जावे मधुशाला || १०७ ||
एक बखत संतुष्ट बोत थो पार मै थोड़ी सिक हाला ,
भोलो सो थो म्हारो साकी, छोटो सो म्हारो प्यालो ,
छोटे से इए जग री म्हारे स्वर्ग बलाया लेतो थो ,
फेलोड़े जग मे, हाय , गयी गुम म्हारी मधुशाला || १०८ ||
निरा सारा मदिरालय देख्या , निरी सारी देखि हाला ,
तरे तरे रो आयो म्हारे हाथो माया मधु रो प्यालो ,
एक एक सु बढ़कर , सुन्दर साकी सत्कार कियो ,
जची नई आँख्या माया ,पण , कोई पेली जीसी मधुशाला || १०९ ||
एक बखत ढूलिया करती थी म्हारे होठो माथे हाला ,
एक बखत झुमाया करतो हो म्हारे हाथो माथे प्यालो ,
एक बखत पीवन वाला . साकी गले मिलिया करता था ,
आज बनी है सुनी मरघट , एक बखत थी मधुशाला || ११०||
बाल कालजे री भट्टी खिंची मै आंसू री हाला ,
छलछल छ्ल्किया करतो , इसु पल पल पलकों रो प्यालो ,
आँख्या आज बनी है साकी , गाल गुलाबी पिते होवे ,
केवोना एक्लो मने मै हूँ चलती फिरती मधुशाला || १११ ||
किती जल्दी रंग बदले है आपरो चंचल हाला ,
किती जल्दी घसिजन लागे हाथो माया आर प्यालो ,
किती जल्दी साकी रो मोहनो घट्न लागे है ,
भोर कोणी थी बीसी , जीसी रात लागी थी मधुशाला || ११२ ||
टोपे टोपे रे तान कदी थने तरसासी हाला ,
कदी हाथ सु खुस जासी थ्रो ओ मादक प्यालो ,
पीवन वाला , साकी री मीठी बात्यों मे नआया,
म्हारा भी गुण इया गावती एक दिन थी मधुशाला || ११३ ||
छोड्या मै मार्ग मतों ने जने भजियो मतवालों ,
चाली सुरा म्हारा पग धोवन तोडियो जद मै प्यालो ,
अबे मानी मधुशाला म्हारे लारे लारे फिर री है ,
कई कारण ? अबे छोड़ दियो है मै जाव्नो मधुशाला || ११४ ||
ओ ना समझिया, पियो हाडाहड मै , जद मिली नई हाला ,
जने मै खपरेल परोटी ले सक्तो रो जद प्यालो ,
बलियोड़े कालजे ने और बाल्नो सुजियो , मने मरघट ने ,
लेलिया जद इए चरणों मे जाय रयी थी मधुशाला || ११५ ||
किती आई और गई पीर इए मदिरालय मे हाला ,
टूट गी अबार तक किताई मादक प्यालो री माला ,
किता साकी आप आप रा काम ख़तम कर परार दूर गया ,
किता पीवन वाला आया , पण सागी है मधुशाला || ११६ ||
किता होठो ने राखसी याद भला मादक हाला ,
किता हाथो ने राखसी याद भला पागल प्यालो ,
किती सूरतो ने राखसी याद भला भोला साकी ,
किता पीवन वालो मे है एक एकली मधुशाला || ११७ ||
दर दर घूम रियो थो मै चिख्तो - हाला ! हाला ,
मने ना लाध्तो थो मदिरालय मने ना लाध्तो थो प्यालो ,
मिलाप हुयो ,पण कोणी मिलन सुख लिखियोड़ो थो किस्मत मे,
मे अबे जम्परार बेठ्ग्यो हूँ घूम री है मधुशाला || ११७ ||
मै मदिरालय रे माया हूँ , म्हारे हाथो मै प्यालो ,
प्यालो मे मदिरालय बाँटन वाली है हाला ,
इए उधेड़ -बुन माया म्हारो सगलो जीवन बीत गयो -
मे मधुशाला रे माया या माहरे माया मधुशाला || ११९ ||
किरो कोणी पीवन सु नातो , कीने कोणी भावे प्यालो ,
इए जगती रे मदिरालय मे तरे तरे री है हाला
आप आप री इच्छा रे हिसाब सु सगला पीर मदमावे,
एक सब री मादक साकी , एक सगला री मधुशाला || १२० ||
बा हाला , कर शांत सके जीकी म्हारे अंतस री ज्वाला ,
जीके मे मै छाया पर्छाया हर पल , बो म्हारो प्यालो ,
मधुशाला बा कोणी जठे मदिरा बेचीं जावे ,
मिलाप जठे मस्ती री मिलती म्हारी तो बा मधुशाला || १२१||
मतवालों पण हाला सु लेर मै तज दी है हाला '
गेलाई लेर प्याले सु , मै त्याग्यो प्यालो ,
साकी सु मिलर , साकी मे मिलर अपनायत मै भूल गयो ,
मिलर मधुशाला री मधुता मे भूल गयो मै मधुशाला || १२२ ||
मदिरालय रे किवाड़ ठोकता किस्मत रा छ्न्छो प्यालो ,
गेरी , ठंडी सासा भर भर केतो थो हर मतवालों ,
किती थोड़ी सी जवानी री हाला , हां मै पि पायो ,
बंद होयगी किती जल्दी माहरे जीवन री मधुशाला || १२३ ||
कथे गयो बो स्वर्गिक साकी , कठे गयी सुरभित हाला ,
कठे गयो सप्नारो मदिरालय ,कठे गयो सोनलिया प्यालो ,
पीवन वालो मदिरा री कीमत , हाय , कद पिचानी ,
फुट गयो जद मधु रो प्यालो , टूट गयी जद मधुशाला || १२४ ||
आप रे युग मे सब ने अलाय्दी सामे आई आप री हाला ,
आप रे युग मे सब ने अलाय्दो सामे आयो आप रो प्यालो ,
फेर भी बदरा सु जद पूछियो जने एक उतर पायो -
अबे ना रिया बे पीवन वाला , अबे ना रेई बा मधुशाला || १२५ ||
'मय' ने कर शुद्ध दियो अबे नाम गयो बीरो ,'हाला '
'मीना ' ने 'मधु ठांव ' दियो 'समदर' रो नाव गयो प्यालो ,
क्यों ना मौलवी चोंके , बिच्किजे टिके - आड़ पंडित जी ,
'मय- महफ़िल ' अबे अपनाय ली है मै कर पनार मधुशाला || १२६||
किता घाव जता जावे है बार बार आर हाला ,
किता भेद बताजावे है बार बार आर प्यालो ,
किता अर्थो ने संकेतो सु बता जावे साकी ,
फेर भी पीवन वालो खातिर है एक आड़ी मधुशाला || १२७ ||
जीती कालजे री गहराई होवे बीतो गेरो है प्यालो ,
जीती मन री मादकता होवे बीती मादक है हाला ,
जीती उर री भावुकता है बीती फूटरी साकी है ,
जीतो ही है रसियो , बिने है बीती ही रसमय मधुशाला || १२८ ||
जीके होठो ने छुवे , बना दे बियाने मस्त म्हारी हाला ,
जीके हाथ ने छुले , कर दे , दूर बीमे माहरो प्यालो ,
आँख्या चार होवे जीके री माहरे साकी सु दिवानो हो ,
गेलो होर नाचे बो जीको आवे म्ह्हरी मधुशाला || १२९ ||
हर जीभ माथे देखि जासी म्हारी मादक हाला ,
हर हाथ मे देखियो जासी म्हारे साकी रो प्यालो ,
हर घर मे बातोचितो अबे होसी म्ह्हरे मधु बेचन वाले री ,
हर आंगने माया गमक उठसी म्हारी सुरभित मधुशाला || १३० ||
म्हारी हाला माया सब पायी आप आपरी हाला ,
म्हारे प्याले माया सब ने मिलियो आप आपरो प्यालो ,
म्हारे साकी माया सा जाना आपरो प्रेम साकी देख्यो ,
जीके री जीसी रूचि थी बीए बीसी देखि मधुशाला || १३१ ||
ऐ मदिरालय रा आंसू है , नई नई मादक हाला ,
ऐ मदिरालय री आँख्या है , नई नई मधु रो प्यालो ,
कोई बखत री सुखद याद है साकी बनर नाच रयी ,
नई नई कवी रे कालजे रो आँगन , आ तनाव भरोडी मधुशाला || १३२ ||
ख़राब इच्छा किती आपनी , हाय , बना पायो हाला ,
किता अरमानो ने कर परार खाक बना पायो प्यालो ,
पीर पीवन वाला चल्याजासी ,हाय, ना कोई जाणसी ,
किता मन रा महल ढाया जने खड़ी हुई आ मधुशाला ||
१३३ ||
संसार थारे जहरीले जीवन माया लेर आसी हाला ,
जे थोड़ी सी भी आ म्हारी मदमाती साकी बाला ,
मिंडी थारी घडिया कई भी जे गुंजा पायी ,
जलम सफल समझसी जग मे आप रो म्हारी मधुशाला || १३४ ||
बड़े बड़े नाजोसू मै पाली है साकी बाला ,
कमी कल्पना रो ही इए सदा उठातो है प्यालो ,
मान - दुलार सु ही राखिये इए म्हारी सुकुमारी ने ,
संसार , थारे हाथो मे भोलाय रियो हूँ मधुशाला || १३५ ||
परिशिष्ट सु .
खुद नई पीवे , ओरो ने , पण पाय देवे हाला ,
कुछ कोणी छुवे, ओरो ने , पण जलादे प्यालो ,
पण उपदेश पारंगत बोत तरे रा सु मै ओ सिखियो है ,
खुद कोणी जावे , ओरो ने पोचादे मधुशाला ||
मै कायस्थ कुलोद भाव म्हारे पुरखो इतो ढलियो,
म्ह्हरे सरीर रे खून मे है पचहतर प्रतिशत हाला ,
पुश्तेनी अधिकार मने है मदिरालय रे आँगन माथे ,
म्हारे दादों परदादों रे हाथो बिकी थी मधुशाला ||
बोतो रे माथे चार दिन तक चढर उतर गी हाला ,
बोतो रे हाथो मे दो दिन छलक झलक रित्यो प्यालो ,
पण बढती तासीर सुरा री सागे बखत रे ,इसु ही ,
पित्र पक्ष मे बेटे ने उठानो अधर ना कर मे . पण प्यालो ,
बेथ कठेई जाए , गंगा सागर मे भर परार हाला ,
कोई जगा री मिटटी भीजे , धाप मने आजासी ,
दान पुन करिया मने पढ़ पढ़ परार मधुशाला ||
डॉ. हरिवंश राय बच्चन
अनुवादक
योगेन्द्र कुमार पुरोहित
मास्टर ऑफ़ आर्ट
बीकानेर, इंडिया
Yogendra kumar purohit
Master of Fine Art
Bikaner, INDIA
1 comment:
hetaalu yogi bhai
ghane maan su bhadhai rajasthaani madhu saalaa saaru
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